|
चीन और दक्षिण कोरिया ने चिंता जताई | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
उत्तर कोरिया के परमाणु कार्यक्रम को लेकर चल रही बातचीत में आए गतिरोध को लेकर चीन और दक्षिण कोरिया के नेताओं ने चिंता जताई है. उन्होंने उत्तर कोरिया से अपील की है कि वह छह देशों की वार्ता को फिर बहाल करे जो पिछले साल जून में टूट गई थी. दक्षिण कोरिया और चीन लगातार संयुक्त राष्ट्र और उत्तर कोरिया के बीच मतभेद कम करने की कोशिश कर रहे हैं. वे इस बात को लेकर बेहद आशावादी हैं कि उत्तर कोरिया बातचीत के लिए राज़ी हो जाएगा, कम से कम ज़ाहिर तौर पर तो उनका व्यवहार ऐसा ही है. लेकिन रूस में हुई मुलाक़ात के बाद चीन के राष्ट्रपति हू जिंताओ और रो मू हून ने ताज़ा हालात पर चिंता जताई है. दक्षिण कोरिया के एक प्रवक्ता ने कहा है कि उन्होंने उत्तर कोरिया से अपील की है कि वह कोरियाई प्रायद्वीप को परमाणु हथियारों से मुक्त करवाने के लिए बातचीत तुरंत शुरु करे. यह चिंता इन ख़बरों के बाद भी बढ़ी है कि उत्तर कोरिया परमाणु परीक्षण करने की तैयारी कर रहा है. अमरीका हालांकि कहता रहा है कि वह इस मामले का शांतिपूर्ण हल चाहता है लेकिन हाल के दिनों में उन्होंने दूसरे संकेत भी दिए हैं. दूसरी ओर उत्तर कोरियाई रेडियो ने कहा है कि सिर्फ़ अमरीका के पास परमाणु हथियार रखने और उनका पहले इस्तेमाल करने का अधिकार नहीं है. रेडियो ने कहा कि उत्तर कोरिया युद्ध के ख़िलाफ़ है लेकिन यदि युद्ध थोप दिया गया तो व कार्रवाई करने से नहीं हिचकेगा. |
| ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||