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परमाणु वार्ता से अलग हुआ उत्तर कोरिया | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
उत्तर कोरिया ने अपने परमाणु कार्यक्रम पर चल रही बातचीत से अलग होने की घोषणा की है. देश के विदेश मंत्रालय के अनुसार उत्तर कोरिया इस मुद्दे पर चल रही छह देशों की वार्ता से अनिश्चित काल के लिए अलग हो रहा है. उत्तर कोरिया का कहना है कि अब इस मुद्दे पर बातचीत का कोई मतलब नहीं क्योंकि अमरीका ने उसे 'शैतानियत की धुरी' कहा है. उत्तर कोरिया की घोषणा पर पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए अमरीका की विदेश मंत्री कोंडोलीज़ा राइस ने कहा है कि ऐसा करके उत्तर कोरिया और अलग-थलग पड़ जाएगा. राइस ने कहा, "दुनिया ने उत्तर कोरिया को इस स्थिति से निकलने का मौक़ा दिया था लेकिन उन्होंने अब यह मौक़ा गँवा दिया है." अमरीकी विदेश मंत्री ने इस बात को दोहराया है कि वे कोरिया को एक परमाणु हथियार मुक्त क्षेत्र के रूप में देखना चाहते हैं. विवाद अमरीका और उत्तर कोरिया के बीच राजनयिक विवाद अक्तूबर 2002 में शुरू हुआ था जब अमरीका ने आरोप लगाया कि उत्तर कोरिया में ग़ैर क़ानूनी परमाणु कार्यक्रम चल रहा है. उसके बाद तीन दौर की बातचीत हो चुकी है लेकिन कोई विशेष प्रगति नहीं हो पाई. इस बातचीत में चीन, जापान, रूस और दक्षिण कोरिया भी शामिल हुए. अब उत्तर कोरिया के विदेश मंत्रालय की ओर से जारी एक बयान में कहा गया है, "हम छह देशों की बातचीत के ख़िलाफ़ थे लेकिन हमें अनिश्चित काल के लिए बातचीत से अलग होने के लिए मजबूर किया गया है." बयान में यह भी कहा गया है कि उत्तर कोरिया ने आत्मरक्षा के लिए परमाणु हथियार बना लिया है और अपने सिद्धांत, व्यवस्था, आज़ादी और लोकतंत्र की रक्षा के लिए अपना परमाणु कार्यक्रम की दिशा में क़दम उठाएगा. वैसे पहले भी कई बार उत्तर कोरिया सरकार के वरिष्ठ सदस्यों ने दबे स्वर में परमाणु हथियार बना लेने का दावा किया है लेकिन शायद यह पहली बार है कि सार्वजनिक रूप से इसके बारे में इतना ज़ोर-शोर से ज़िक्र किया गया है. अमरीका और अन्य ख़ुफ़िया एजेंसियों का भी मानना है कि उत्तर कोरिया ने दो से 10 छोटे परमाणु हथियार बना लिए हैं. चिंता उधर नेटो के महासचिव याप द हूप शेफ़र ने उत्तर कोरिया की घोषणा को एक चिंताजनक क़दम बताया है.
उन्होंने कहा, "उन्हें यह समझाना होगा कि वार्ता की मेज़ ही इन बातों पर चर्चा के लिए उचित तरीक़ा है. मैं मानता हूँ कि चीन, रूस और अमरीका भी यह जानते हैं और इसलिए अंतरराष्ट्रीय दबाव से उसे फिर बातचीत में शामिल किया जाना चाहिए. अगर उत्तर कोरिया फिर भी नहीं माना तो यह हमारे लिए बहुत बड़ी समस्या बन सकती है. " फ़िलहाल उत्तर कोरिया ने इस बात का कोई संकेत नहीं दिया है कि वे फिर बातचीत में कैसे शामिल होंगे. जानकारों का कहना है कि एक बार फिर उत्तर कोरिया ने अपने इरादों के बारे में दुनिया को सोच में डाल दिया है. पिछले सितंबर में बीज़िंग में होने वाली छह दलीय बैठक में जब उसने भाग लेने से इनकार कर दिया था तब कहा गया कि वो अमरीकी चुनावों के परिणाम का इंतज़ार कर रहा है. राष्ट्रपति बुश की विजय भले उत्तर कोरिया की कम्युनिस्ट सरकार को रास न आई हो, लेकिन अपने उदघाटन भाषण और देश के नाम पहले संदेश में बुश ने उत्तर कोरिया के संबध में कूटनयिक भाषा का इस्तेमाल किया. लेकिन उनके नपे तुले शब्दों का कोई फ़ायदा नहीं हुआ लगता है. उत्तर कोरिया ने घोषणा की कि परमाणु कार्यक्रम ख़त्म करने के लिए बातचीत से अलग हो रहा है. |
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