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उत्तर कोरिया ने समझौते की पहल की | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
उत्तर कोरिया ने एक बार फिर अमरीका के साथ शांति समझौते की पेशकश की है. उत्तर कोरिया का बयान ऐसे समय आया है जब उसके परमाणु कार्यक्रम को लेकर बातचीत दोबारा शुरू हो रही है. उत्तर कोरिया ने एक बयान जारी करके कहा है कि संकट को ख़त्म करने के लिए दोनों देशों के बीच नयी संधि की ज़रूरत है जो 1953 की संधि की जगह होगी. दरअसल 1953 में कोरियाई युद्ध की समाप्ति के साथ जो संधि हुई थी वह सिर्फ़ युद्धविराम के लिए था और उसे शांति समझौता नहीं माना जाता. अगले सप्ताह मंगलवार को बीज़िंग में उत्तर कोरिया के परमाणु कार्यक्रम पर छह देशों की बातचीत शुरू होने वाली है. इन छह देशों में शामिल हैं- उत्तर कोरिया, दक्षिण कोरिया, चीन, अमरीका, जापान और रूस. पिछले साल फरवरी में उत्तर कोरिया छह देशों की बातचीत से अलग हो गया था. उसके बाद उत्तर कोरिया की ओर से कई बार ऐसे बयान आए हैं जिनमें कहा गया है कि उसके पास परमाणु हथियार है. पहल पहले भी उत्तर कोरिया ने अमरीका के साथ ऐसी संधि की पहल की थी जिसमें प्रस्ताव था कि अमरीका उत्तर कोरिया पर आक्रमण नहीं करेगा.
लेकिन अमरीका ने यह कहते हुए इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया था कि जब तक उत्तर कोरिया अपने परमाणु कार्यक्रम बंद करने पर सहमत नहीं होता, इसका कोई मतलब नहीं. शुक्रवार को जारी एक बयान में उत्तर कोरिया के विदेश मंत्रालय ने कहा है, "कोरियाई प्रायद्वीप में युद्धविराम संधि की जगह शांति समझौता लागू होने से उत्तर कोरिया के प्रति अमरीका की उग्र नीति समाप्त हो जाएगी." बयान में कहा गया है कि प्रस्तावित शांति समझौते से अपने आप प्रायद्वीप परमाणु शस्त्र रहित क्षेत्र हो जाएगा. गुरुवार को एक उत्तर कोरियाई अधिकारी ने कहा था कि अगर इस इलाक़े से अमरीका का परमाणु ख़तरा ख़त्म हो जाता है तो उन्हें एक भी परमाणु हथियार की आवश्यकता नहीं होगी. अधिकारी ने यह भी मांग की कि अमरीका उनके देश और अन्य देशों के बीच आर्थिक समझौते की राह में न आए. उन्होंने यह भी मांग की कि अमरीका उत्तर कोरिया का नाम उन देशों की सूची से हटाए जिन्हें वह आतंकवाद को समर्थन देने वाला देश मानता है. अधिकारी ने उत्तर कोरिया पर लगाए गए प्रतिबंध हटाने की भी मांग की. हालाँकि अमरीका का कहना है कि अगर उत्तर कोरिया परमाणु संकट ख़त्म नहीं करता, तो उसे और प्रतिबंध झेलने पड़ सकते हैं. |
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