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ग्वांतनामो के बंदी भूख हड़ताल पर | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
मानवाधिकार वकीलों ने कहा है कि क्यूबा के ग्वांतानामो बे में अमरीकी नौसैनिक अड्डे में रखे गए बंदियों में से अनेक ने इस माँग के साथ भूख हड़ताल शुरू की है कि या तो उन्हें रिहा किया जाए या फिर उन पर मुक़दमा चलाया जाए. इनमें से कुछ बंदियों को इस अड्डे पर तीन साल से ज़्यादा समय हो गयाहै और उन पर अभी कोई आरोप नहीं निर्धारित किया गया है. इनमें से कुछ बंदियों के वकीलों ने कहा है कि लगभग 200 बंदियों ने खाना खाने से मना कर दिया है. सैन्य अधिकारियों ने ऐसे बंदियों की संख्या 76 बताई है. इससे पहले जुलाई में भी भूख हड़ताल की गई थी जो बंदियों के साथ बातचीत के लिए पेंटागन के राज़ी हो जाने पर समाप्त हुई थी. बंदियों ने फिर से यह आरोप लगाते हुए भूख हड़ताल शुरू की है कि अधिकारी बातचीत करने के अपने वादे से मुकर रहे हैं. बंदियों ने अपने साथ ख़राब बर्ताव का भी आरोप लगाया है. वकीलों ने कहा है कि एक बंदी ने तो भूख हड़ताल से अपनी मौत की आशंका जताते हुए अपनी वसीयत भी लिख दी है. न्यूयॉर्क स्थित एक मानवाधिकार संगठन सेंटर फ़ॉर कांस्टीट्यूशनल राइट्स ग्वांतनामो बे शिविर में रखे गए क़रीब 500 बंदियों में से कुछ का प्रतिनिधित्व क़ानूनी लड़ाई के लिए कर रहा है. संगठन के एक कार्यकर्ता गीतांजलि गुटिएर्रेज़ ने कहा है कि अमरीकी रक्षा मंत्रालय पेंटागन ने बंदियों को पर्याप्त क़ानूनी सहायता से वंचित किया है. उन्होंने कहा कि इस नीति ने ही बंदियों को भूख हड़ताल करके अपनी जान देने के लिए मजबूर किया है, या फिर उन्हें निष्पक्ष सुनवाई का मौक़ा दिया जाए और उनके साथ मानवीय बर्ताव किया जाए. पेंटागन ने कहा है कि सिर्फ़ 76 बंदी ही खाना खाने से इनकार कर रहे हैं, न कि 200, जैसाकि वकीलों ने दावा किया है. लेकिन पेंटागन ने इस बारे में कुछ नहीं बताया है कि भूख हड़ताल कब शुरू हुई. पिछली भूख हड़ताल के दौरान बंदियों की निगरानी चिकित्सा विशेषज्ञों ने की थी और आवश्यकतानुसार बंदियों को अस्पतालों में भी दाख़िल कराया गया था. |
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