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मंगलवार, 25 जनवरी, 2005 को 08:09 GMT तक के समाचार
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चार ब्रितानी ग्वांतनामो से स्वदेश लौटे
ग्वांतनामो बे शिविर में बंदी
मोअज़्ज़म बेग और फ़िरोज़ अब्बासी लौटने वाले चार लोगों में शामिल हैं.
क्यूबा के ग्वांतानामो बे में अमरीकी नौसैनिक अड्डे पर रखे गए चार ब्रितानी मंगलवार को स्वदेश लौट आए हैं. अब ग्वांतानामों बे में क़ैद किए गए सभी ब्रितानियों स्वदेश आ गए हैं.

लेकिन स्वदेश लौटते ही उन्हें गिरफ़्तार कर लिया और इस समय उन्हें पैडिंगटन ग्रीन पुलिस स्टेशन में रखा गया है.

इस समय पुलिस स्टेशन के बाहर प्रदर्शन हो रहे हैं लेकिन पुलिस का कहना है कि उसे इस बात की जाँच करनी है कि इन चारों को क्यों पकड़ा गया था?

चरमपंथी गतिविधियों में शामिल होने के संदेह में शिविर में इन्हें बंदी बनाकर रखा गया था और वे क़रीब तीन साल से बिना मुक़दमे के अमरीकी हिरासत में थे.

इनमें से एक व्यक्ति बरमिंघम से है और तीन लंदन से हैं. अमरीका ने उन पर चरमपंथी संगठन अल क़ायदा से संबंधित होने का आरोप लगाया था.

अमरीका का आरोप था कि इन चार लोगों ने अल क़ायदा के प्रशिक्षण शिविरों में हिस्सा लिया था.

इन चार ब्रितानियों के नाम हैं - मोअज़्ज़म बेग, मार्टिन मुबान्गा, रिचर्ड बेलमर और फ़िरोज़ अब्बासी. इनके लौटने पर इनसे ब्रितानी क़ानून के तहत पूछताछ किए जाने की संभावना है.

ब्रिटेन और अमरीका के बीच व्यापक बातचीत के बाद इनकी रिहाई संभव हो सकी है.

ब्रिटेन ने इन लोगों के बारे में अमरीका को सुरक्षा की गारंटी दी है.

अमरीका ने ग्वांतनामो बे शिविर में रखे गए क़रीब 800 में से 200 बंदियों को अब तक रिहा कर दिया है. इनमें से ज़्यादातर पर तालेबान और अल क़ायदा से संबंध होने का आरोप रहा है.

शिविर में रखे गए ज़्यादातर बंदियों को अफ़ग़ानिस्ताम पर 2001 में किए गए हमले के बाद पकड़ा गया था.

राहत

मानवाधिकार संगठन एमनेस्टी इंटरनेशन ने इन लोगों की वापसी का स्वागत करते हुए कहा है कि यह काफ़ी पहले हो जानी चाहिए थी.

संगठन के एक प्रवक्ता माइक ब्लैकमोर ने कहा, "हम प्रसन्न हैं कि इन चार लोगों और उनके परिवारों की चिंताएँ ख़त्म हो रही हैं."

ग्वांतनामो बे शिविर से पाँच अन्य ब्रितानी पिछले साल छोड़े गए थे और उन्हें ब्रिटेन में भी पूछताछ के बाद बिना किसी आरोप के रिहा कर दिया गया था.

इनमें से कुछ ने बाद में कहा था कि उन्हें ग्वांतनामो बे शिविर में काफ़ी प्रताड़ित किया गया था जिसमें ज़मीन पर दर्दनाक तरीके से बिठाना, पीटने जैसे दबाव शामिल थे.

मंगलवार को वापस लौटने वाले चारों लोगों के वकीलों ने ब्रितानी सरकार से अनुरोध किया है कि उन्हें तुरंत रिहा कर दिया जाए.

ब्रितानी विदेश मंत्री जैक स्ट्रॉ ने 11 जनवरी को इन चार लोगों की रिहाई की घोषणा करते हुए कहा था कि पुलिस और सरकारी अभियोजन पक्ष ही यह फ़ैसला करेंगे कि उन पर मुक़दमा चलाया जाए या नहीं.

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