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सोमवार, 22 अगस्त, 2005 को 02:27 GMT तक के समाचार
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समयसीमा तीन दिन के लिए और बढ़ी
इराक़
सबसे ज़्यादा मतभेद है संघीय शासन व्यवस्था को लेकर
लंबी बहस की बीच समय-सीमा गुज़र गई लेकिन इराक़ी संविधान के मसौदे पर सहमति नहीं बन सकी.

अब संविधान के मसौदे पर विचार-विमर्श के लिए समय-सीमा तीन दिन और बढ़ा दी गई है.

इससे पहले तय की गई समयसीमा ख़त्म होने से पहले सांसदों ने बैठक की लेकिन मतदान नहीं किया.

इराक़ी संसद के स्पीकर हाशिम अल हसनी ने बैठक में कहा कि उन्हें देश के संविधान का मसौदा मिल गया है लेकिन अभी कई मुद्दों पर सहमति नहीं बन सकी है.

इनमें संघीय ढाँचा और सरकार, राष्ट्रपति और संसद के अधिकारों के मुद्दे अहम हैं.

असहमति

दिन में शिया नेताओं ने घोषणा कर दी थी कि उनकी कुर्दों के साथ सहमति बन चुकी है लेकिन सुन्नी नेताओं ने इस पर अपना ऐतराज़ जताया.

सुन्नी मुसलमानों का कहना था कि अगर ये मसौदा लागू होता है तो इराक़ बिखर सकता है. कुर्द समुदाय का कहना था कि सुन्नियों की सहमति के बिना मसौदा तैयार नहीं किया जाना चाहिए.

मसौदा तैयार करने की समयसीमा पिछले हफ़्ते ही ख़त्म हो गई थी लेकिन सहमति न बन पाने के चलते इसे सोमवार आधी रात तक बढ़ा दिया गया था.

संघीय ढाँचे को लेकर सुन्नी समुदाय की अपनी चिंताएँ हैं. उसका मानना है कि संघीय ढाँचे से दक्षिण इराक़ में शियाओं का स्वायत्त इलाक़ा बन जाएगा.

सुन्नी समुदाय को इस बात की भी चिंता है कि कुर्द और शिया समुदाय को ज़्यादा स्वायत्ता देने से तेल से मिलने वाले राजस्व पर उसे समझौता करना पड़ सकता है.

बहुमत

शिया और कुर्द सदस्यों के पास संसद में बहुमत है और वो शिया समुदाय के बगैर भी मसौदे को पारित करवा सकते हैं लेकिन संवाददाताओं का कहना है कि ये क़दम राजनीतिक स्तर पर नुक़सान पहुँचा सकता है.

तेल संसाधन
तेल के बटवारे को लेकर सुन्नी समुदाय की अपनी चिंताएँ हैं

सुन्नी नेता सलेह मुतलाक़ ने कहा है कि शिया और कुर्द समुदाय ने हफ़्ते भर अलग से बैठक की और सुन्नियों को संविधान का मसौदा समयसीमा ख़त्म होने के कुछ घंटे पहले दिया गया.

उधर अमरीका का कहना है कि संविधान का मसौदा तैयार करने में अगर देर होती है तो विद्रोही इसका फ़ायदा उठा सकते हैं.

संविधान के मसौदे पर अक्तूबर में जनमतसंग्रह होना है. अगर जनमतसंग्रह में इसे स्वीकार कर लिया गया तो शायद दिसंबर तक पूर्ण अधिकारों वाले संसद के लिए नए चुनाव हो जाएँगे.

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