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लंदन पुलिस प्रमुख का इस्तीफ़ा माँगा | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
22 जुलाई को लंदन पुलिसे की गोली से मारे गए ब्राज़ीली नागरिक ज्याँ चार्ल्स डी मेनेज़ेस के समर्थकों ने मेट्रोपोलिटन पुलिस के प्रमुख सर इयन ब्लेयर के इस्तीफ़े की माँग की है. ऐसी ख़बरें आई थीं कि पुलिस प्रमुख सर इयन ब्लेयर ने ज्याँ चार्ल्स डी मेनेज़ेस की मौत की जाँच रुकवाने की कोशिश की थी. ज्याँ चार्ल्स डी मेनेज़ेस के परिवार का कहना है कि जाँच शुरू करने में देरी का मतलब है कि अब तक महत्वपूर्ण सबूत ख़त्म हो गए होंगे. ज्याँ चार्ल्स डी मेनेज़ेस के परिवार के वकील गुरूवार को स्वतंत्र पुलिस शिकायत आयोग यानी आईपीसीसी से मुलाक़ात करेंगे. ग़ौरतलब है कि ज्याँ चार्ल्स डी मेनेज़ेस की मौत के मामले की जाँच आईपीसीसी कर रहा है. ज्याँ चार्ल्स डी मेनेज़ेस के परिवार के वकीलों ने कहा है कि आयोग इस मामले की जाँच में देरी कर रहा है और महत्वपूर्ण सबूत नष्ट हो गए हैं. उधर लंदन से प्रकाशित एक अख़बार डेली मिरर में छपी एक ख़बर में कहा गया है कि एक पुलिस कमांडर ने निगरानी टीम को ख़ासतौर से कहा था कि जिस संदिग्ध आत्मघाती हमलावर का वे पीछा कर रहे थे, उसे ज़िंदा पकड़ा जाना चाहिए. ज्याँ चार्ल्स डी मेनेज़ेस की मौत के बारे में लंदन पुलिस ने कहा था कि पुलिस जवानों ने ग़लती से उसे एक 'आत्मघाती हमलावर' समझ लिया था और इसी 'ग़लत पहचान' की वजह से वह पुलिस के हाथों मारा गया. पुलिस ने कहा था कि ज्याँ चार्ल्स डी मेनेज़ेस एक भारी जैकेट पहने हुए था और जब पुलिस ने उसे रुकने की चुनौती दी तो उसने भागना शुरू कर दिया था. एक टेलीविज़न चैनल ने उसे गुप्त रूप से मिले सरकारी दस्तावेज़ों के आधार पर कहा था कि ब्राज़ीलियन नागरिक ज्याँ चार्ल्स डी मेनेज़ेस ने ऐसी कोई हरकत नहीं की थी जिससे कि उस पर आत्मघाती हमलावर होने का संदेह हो. ज्याँ चार्ल्स डी मेनेज़ेस को एक भूमिगत ट्रेन में पुलिस ने आठ गोलियाँ मारी थीं जिनमें से सात उनके सिर में और एक कंधे में मारी गई थीं. टेलीविज़न चैनल आईटीएन ने लीक किए दस्तावेज़ और प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों के आधार पर कहा है कि मेनेज़ेस स्टॉकवैल ट्यूब स्टेशन में किसी टिकट बैरियर को फाँदकर नहीं गए थे. वह उसी तरह ट्यूब तक गए जैसे कि कोई भी यात्री जाता है यानी धीरे-धीरे आराम से चलकर. आईटीएन के अनुसार मेनेज़ेस ने स्टेशन पर एक अख़बार भी उठाया था. जब वो ट्रेन में बैठ चुके थे तब एक पुलिस अधिकारी ने उसे रोका और उसके बाद उसे गोलियाँ मार दी गईं. दस्तावेज़ों के अनुसार चार्ल्स डी मेनेज़ेस ने कोई मोटा जैकेट भी नहीं पहन रखा था जिससे पुलिस को ये शक हो कि उन्होंने जैकेट के अंदर शरीर पर विस्फ़ोटक बाँध रखे हों. उन्होंने डेनिम का एक जैकेट पहना था. |
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