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लंदन पुलिस के दावे पर सवालिया निशान | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
लंदन की भूमिगत रेल में ब्राज़ील के एक नागरिक के पुलिस के हाथों मारे जाने के मामले में पुलिस के दावे पर नए सवाल उठ खड़े हुए हैं. एक टेलीविज़न चैनल ने उसे गुप्त रूप से मिले सरकारी दस्तावेज़ों के आधार पर कहा है कि ब्राज़ीलियन नागरिक ज्याँ चार्ल्स डी मेनेज़ेस ने ऐसी कोई हरकत नहीं की थी जिससे कि उस पर आत्मघाती हमलावर होने का संदेह हो. टेलीविज़न चैनल आईटीएन ने लीक किए दस्तावेज़ और प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों के आधार पर कहा है कि मेनेज़ेस स्टॉकवैल ट्यूब स्टेशन में किसी टिकट बैरियर को फाँदकर नहीं गए थे. वह उसी तरह ट्यूब तक गए जैसे कि कोई भी यात्री जाता है यानी धीरे-धीरे आराम से चलकर. आईटीएन के अनुसार मेनेज़ेस ने स्टेशन पर एक अख़बार भी उठाया था. जब वो ट्रेन में बैठ चुके थे तब एक पुलिस अधिकारी ने उसे रोका और उसके बाद उसे गोलियाँ मार दी गईं. दस्तावेज़ों के अनुसार चार्ल्स डी मेनेज़ेस ने कोई मोटा जैकेट भी नहीं पहन रखा था जिससे पुलिस को ये शक हो कि उन्होंने जैकेट के अंदर शरीर पर विस्फ़ोटक बाँध रखे हों. उन्होंने डेनिम का एक जैकेट पहना था. चुप्पी पुलिस के ख़िलाफ़ शिकायत की जाँच करने वाले ब्रितानी आयोग ने टेलीविज़न चैनल के दावे के बारे में कोई टिप्पणी नहीं की है. सरकार और पुलिस की ओर से भी इस पर कोई बयान नहीं आया है. चार्ल्स डी मेनेज़ेस परिवार की वक़ील हैरिएट विस्ट्रिच की प्रतिक्रिया थी, "इससे स्पष्ट हो जाता है कि समाचारों में पहले जो ख़बर प्रकाशित हुई थी वो ग़लत थी. इस बात में कोई सच्चाई नहीं है कि मेनेज़ेस पुलिस से बचकर भाग रहा था." मेनेज़ेस की हत्या के बारे में माना जाता है कि पुलिस एक मकान पर नज़र रख रही थी जिसके बारे में उसे शक था कि वहाँ के लोग हमलावरों से जुड़े हुए हैं. चार्ल्स डी मेनेज़ेस उसी मकान से निकले और वहाँ नज़र रख रहे पुलिसकर्मियों को ये ग़लतफ़हमी हुई कि वह हमलावरों में से एक है. |
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