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सदियों पुराने हैं ईरान और भारत के रिश्ते | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत ईरान संबंधों की बात करते हैं तो सबसे पहले भाषा के रिश्तों पर नज़र पड़ती है. अंजीर हो या अनार, फ़र्श हो या जंगल सभी शब्द फ़ारसी से हिंदी, उर्दू में आए. पर भाषा तक ही दोनों देशों के रिश्ते सीमित नहीं. भारत में अक्सर लोग बात करते हैं भारत और उस पर राज करने वाले ब्रिटिश शासन की. दोनों के बीच संबंधों की, अंग्रेज़ी भाषा की, रेल लाइनों की. पर इससे बहुत पहले भारत से कहीं अधिक छोटे एक देश का भारत पर असर का ज़िक्र कम ही होता है. जहाँ ईरान में बौद्ध धर्म का असर दिखाई देता है वहीं सूफ़ी पद्धति भारत और ईरान के संपर्क से उपजी. लोग तो ये भी कहते हैं कि ताजमहल की रूह ईरानी है और शरीर भारतीय. मुगलकालीन वास्तुकला और शिल्पकला में ईरान की छाप साफ़ नज़र आती है. भारत में उमर खैयाम और फिरदौसी को कौन नहीं जानता. वहीं इस्फ़हान शहर के चहल सौतुन महल में भारत से भागे हुमाँयू की शाह ताहमस्प के महल में स्वागत के चित्र है. साथ ही नृत्य करती युवतीं का एक चित्र है जिसे कुछ लोग भारत की सती प्रथा का चित्रण बताते हैं. दोनों देश फ़ारसी भाषा, ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और कलात्मक वस्तुओं को अपनी साझा विरासत मानते हैं और भारत ने इसे हिफाज़त से रखने के लिए भारत ने ईरान के साथ एक सांस्कृतिक समझौते पर हस्ताक्षर किए थे. भारत चाहता है कि ईरान में एक सांस्कृतिक केंद्र खोला जाए जिससे इस क्षेत्र में दोनों देशों के बीच संबंध प्रगाढ़ हो सके. राजनीतिक संबंध भारत-ईरान संबंध में पुरानी गर्मजोशी 90 के दशक से फिर देखी गई. उसके पहले के कुछ दशक ईरान के लिए उथल-पुथल भरे रहे और भारत ईरान-इराक़ युद्ध में चुप्पी साधे रहा क्योंकि दोनों देशों से उसके संबंध थे. पर प्रधानमंत्री पीवी नरसिंह राव की 1993 की ईरान यात्रा ने दोनों देशों के रिश्तों का नया दौर शुरू किया. ईरान के राष्ट्रपति रफ़सनजानी और फिर ख़ातमी भारत आए तो अटल बिहारी वाजपेयी ने भी ईरान की यात्रा की. आर्थिक संबंध दोनों देशों के बीच कई साझा कार्यदल है जो हाइड्रोकारबन, उद्योग, कृषि आदि क्षेत्रों में कार्यरत हैं.
ईरान में दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा तेल भंडार है, तेल निर्यातक देशों के संगठन ओपेक का वो दूसरा सबसे बड़ा तेल उत्पादक है. ईरान के गैस भंडार दुनिया में दूसरे नंबर पर है. और तेल पर ही भारत ईरान का ज़्यादातर व्यापार टिका है. हाल में भारत ने ईरान से 5 मिलियन मीटरिक टन एलएनजी आयात का समझौता किया है और पाकिस्तान से ज़रिए ईरान से गैस पाइप लाइन लाने पर कई दौर की बातचीत भी हो गई है. भारत मानता है कि ईरान वो रास्ता है जो उसे सीधे पश्चिम से जोड़ता है. ईरान के सहयोग से अफ़गानिस्तान सीमा पर सड़क निर्माण का काम चल रहा है. साथ ही भारत को आशा है कि ईरान और अज़रबैजान के बीच रेल संपर्क स्थापित होने पर वह ज़मीन मार्ग से यूरोप से सीधा संपर्क साध पाएगा. धार्मिक और शिक्षा संबंध भारत आ कर पढ़ने वाले ईरानी छात्रों की संख्या निरंतर बढ़ रही है. वहीं भारत से हज़ारों लोग शिया धर्मस्थल मशाद जाते हैं. भारत में 2002 में जहाँ 7437 ईरानी आए वहीं 2004 में ये संख्या बढ़कर 17668 हो गई. संबंध बदल रहे हैं- ईरान से सूफ़ी गायक भारत आ रहे हैं. वहां के मशहूर फ़िल्मकार मोहसिन मख्मलबफ़ भारत में फ़िल्म बना रहे हैं तो भारतीय फ़िल्में काले बाज़ार के ज़रिए ईरान पहुँच रही है और भारत ईरान से तेल संबंधो को और मज़बूत बनाने की कोशिश कर रहा है. |
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