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'इराक़ में अब तक 25 हज़ार मौतें' | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
एक रिपोर्ट के अनुसार दो साल पहले अमरीका के नेतृत्व में इराक़ पर हुए हमले के बाद से अभी तक क़रीब 25 हज़ार नागरिक मारे गए हैं और 40 हज़ार से ज़्यादा घायल हुए. इराक़ बॉडी काउंट और ऑक्सफ़ोर्ड रिसर्च ग्रुप ने ये रिपोर्ट तैयार की है. इसका आधार हैं 10 हज़ार से ज़्यादा मीडिया रिपोर्टें. रिपोर्ट लिखने वालों में से एक प्रोफ़ेसर जॉन स्लोबोदा ने बताया, "इराक़ में मरने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है और यह इराक़ में हमला करने के फ़ैसले की ऐसी क़ीमत है जिसे भुलाया जा रहा है." रिपोर्ट में कहा गया है कि इराक़ हमले के दूसरे साल मृतकों की संख्या पहले साल की तुलना में क़रीब दोगुनी हो गई है. रिपोर्ट में बढ़ती चरमपंथी घटनाओं का भी उल्लेख है. दिनचर्या रिपोर्ट में इसका भी ज़िक्र है कि आत्मघाती हमले और गोलीबारी की घटनाएँ इराक़ में दिनचर्या सी बन गई हैं. बग़दाद स्थित मुर्दाघर के प्रमुख का कहना है कि वहाँ प्रतिदिन औसतन 30 शव आते हैं.
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि हिंसा की घटनाओं में भी बड़ी संख्या में लोग मारे जाते हैं लेकिन उनकी संख्या विस्फोटों में मारे गए लोगों की संख्या में नहीं जोड़ी जाती. रिपोर्ट के अनुसार पिछले दो वर्षों के दौरान जितने आम नागरिक मारे गए, उनमें से 37 प्रतिशत अमरीका की अगुआई वाली सेना के कारण मारे गए. शोध में यह भी पाया गया कि आपराधित तत्वों और चरमपंथी गुटों द्वारा भी मारे गए लोगों की संख्या बढ़ी है. रिपोर्ट के मुताबिक़ चरमपंथियों के कारण मारे गए लोगों में से नौ प्रतिशत मारे गए जबकि आपराधिक हिंसा में 36 प्रतिशत लोगों की मौत हुई. इस बात का भी उल्लेख किया गया है कि मारे गए क़रीब 25000 लोगों में से 20 प्रतिशत महिलाएँ और बच्चे हैं. दो वर्षों के दौरान 1700 से ज़्यादा अमरीकी सैनिक मारे गए. इनके अलावा गठबंधन सेना के भी कुछ सैनिक मारे गए. रिपोर्ट में इस बात पर चिंता व्यक्त की गई है कि हमले के दो साल बाद भी न तो अमरीका ने और न ब्रिटेन ने ही इस पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करना शुरू किया है कि उनकी कार्रवाई के कारण कितनी ज़िंदगियाँ तबाह हो रही हैं. |
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