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सद्र ने कहा, हथियारबंद प्रतिरोध जायज़ | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
इराक़ में कट्टरपंथी शिया नेता मुक़्तदा अल सद्र ने कहा है कि देश में हथियारंबद प्रतिरोध जायज़ है. नजफ़ में अमरीकी सैनिकों के ख़िलाफ़ संघर्ष का नेतृत्व करने के कारण वे काफ़ी चर्चित हुए थे. बीबीसी के विशेष कार्यक्रम न्यूज़नाइट में मुक़्तदा अल सद्र ने कहा कि अमरीका के राष्ट्रपति जॉर्ज बुश भी इस बात से सहमत होंगे कि क़ब्ज़ा करने वाली शक्तियों के ख़िलाफ़ संघर्ष सही क़दम है. मुक़्तदा अल सद्र ने पहली बार किसी पश्चिमी मीडिया से बात की है. क़रीब दो सप्ताह पहले किया गया उनका यह इंटरव्यू सोमवार रात न्यूज़नाइट में प्रसारित होगा. बातचीत के दौरान सद्र ने इराक़ियों से अपील की कि वे अमरीकी सैनिकों के प्रति संयम बरतें. उन्होंने कहा कि वे लोकतांत्रिक प्रक्रिया में हस्तक्षेप नहीं करेंगे. मुक़्तदा अल सद्र ने कहा कि जो भी लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भाग लेना चाहता है, उसे इसकी आज़ादी है. लेकिन प्रतिरोध को उन्होंने सही ठहराया. सद्र ने कहा, "प्रतिरोध सभी स्तर पर सही है, चाहे वो धार्मिक मामले हो या बौद्धिक हो या फिर अन्य मामले." उन्होंने कहा कि पहला व्यक्ति जो इसे सही मानेगा, वो होंगे अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश, जिन्होने कहा था कि अगर उनके देश पर कोई क़ब्ज़ा करेगा, तो वे संघर्ष करेंगे. मुक़्तदा अल सद्र ने पहले विदेशी सैनिकों के ख़िलाफ़ राष्ट्रीय स्तर पर संघर्ष की अपील की थी. उन्होंने अपने 'महदी आर्मी' के विद्रोहियों को इराक़ी पुलिस और आक्रमणकारियों से संघर्ष के लिए भेजा था. नरम सद्र लेकिन न्यूज़नाइट से बात करते हुए सद्र ने कहा कि उनका मानना है कि अमरीका संघर्ष नहीं चाहता. उन्होंने कहा, "मैं इराक़ी सेना और इराक़ी पुलिस से अपील करता हूँ कि वे इराक़ी जनता के साथ संयम से पेश आएँ और इराक़ी जनता को अमरीकी सेना या अपने प्रति न भड़काएँ क्योंकि यह इराक़ के हित में नहीं है." मुक़्तदा अल सद्र ने इराक़ी लोगों से भी अपील की कि वे संयम बरतें और पश्चिम और क़ब्ज़ा करने वाली शक्तियों के बहकावे में न आएँ जो उन्हें भड़काना चाहते हैं. उन्होंने कहा कि इराक़ में विदेशी सैनिकों की मौजूदगी ही समस्याओं की असली जड़ है. सद्र ने कहा, "नियंत्रण अपने आप में एक समस्या है. इराक़ का आज़ाद न रहना समस्या है और दूसरी समस्याएँ इससे ही पैदा होती हैं- चाहे वह जातीय संघर्ष हो या फिर गृह युद्ध. अमरीका की मौजूदगी इन सबके पीछे है." इराक़ का नया संविधान 15 अगस्त को आ रहा है लेकिन इराक़ में शिया मुसलमानों के नेता मुक़्तदा अल सद्र ने कहा कि वे संविधान का मसौदा तैयार करने में कोई भूमिका नहीं निभाएँगे और न ही उस समय तक कोई पद लेंगे या कोई राजनीतिक भूमिका निभाएँगे जब तक अमरीकी सैनिक वहाँ मौजूद हैं. सद्र ने कहा, "व्यक्तिगत रूप में मैं कोई हस्तक्षेप नहीं करूँगा. मेरा मानना है कि हमारा संविधान क़ुरान और सुन्ना है. जब तक अमरीकी सेना यहाँ मौजूद है मैं कोई राजनीतिक भूमिका स्वीकार नहीं करूँगा." हालाँकि उन्होंने यह भी स्पष्ट कर दिया कि वे किसी भी इस प्रक्रिया में हिस्सा लेने से नहीं रोकेंगे. |
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