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नजफ़ में स्थिति सामान्य करने की कोशिश | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
इराक़ के नजफ़ शहर में पिछले तीन सप्ताह से जारी लड़ाई के रूकने के बाद अब वहाँ स्थिति सामान्य बनाने की कोशिश की जा रही है. इसी के तहत शनिवार को नजफ़ में इराक़ के सबसे बड़े शिया नेता आयतुल्ला अली सिस्तानी के घर शीर्ष शिया नेताओं की एक बैठक हो रही है. सिस्तानी को नजफ़ संकट का हल निकालने के लिए 24 घंटे का समय दिया गया है जिसके बीच वहाँ संघर्षविराम रहेगा. इस बीच ईरान के राष्ट्रपति मोहम्मद ख़ातमी ने अमरीका को चेतावनी दी है कि उसे इराक़ और अफ़ग़ानिस्तान में ईरान की मदद की ज़रूरत है. उन्होंने तेहरान में एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि अमरीका को पता है कि बिना ईरान की सहायता के वह इन दोनों देशों में कामयाब नहीं हो सकता. उल्लेखनीय है कि अमरीका और इराक़ की अंतरिम सरकार ईरान पर आरोप लगाते रहे हैं कि वह इराक़ के अंदरूनी मामलों में दखल देता रहा है. इस मुद्दे को लेकर ईरान और इराक़ में मतभेद भी रहे हैं और इन्हीं मतभेदों को दूर करने की कोशिशों के तहत इराक़ के उपप्रधानमंत्री ईरान का दौरा कर रहे हैं. नजफ़ में शांति
इसके पहले तीन सप्ताह के बाद पहली बार नजफ़ शहर के लोगों ने शुक्रवार की रात चैन से बिताई. सद्र समर्थकों ने अपने हथियार इराक़ी पुलिस को सौंप दिए हैं जिन्होंने एक शांति योजना के तहत नजफ़ का नियंत्रण अपने हाथों में ले लिया है. ये शांति योजना इराक़ में शिया समुदाय के सबसे बड़े नेता आयतुल्ला अली सिस्तानी की देख-रेख में तैयार हो सकी है. अमरीकी सैनिक भी हज़रत अली के मज़ार की घेराबंदी ख़त्म कर अब पीछे चले गए हैं. मगर इराक़ की अंतरिम सरकार के अनुरोध पर अभी भी कुछ इलाक़ों में अमरीकी सैनिक गश्त लगा रहे हैं. शुक्रवार को हज़ारों शिया श्रद्धालुओं ने हज़रत अली के मज़ार पर जाकर इबादत की और दुआएँ माँगी. मगर नजफ़ में बीबीसी के एक संवाददाता का कहना है कि इराक़ की अंतरिम सरकार मुक़्तदा अल सद्र की मेहदी सेना को तोड़ पाने में नाकाम रहा जिससे ये ख़तरा बना ही हुआ है कि सद्र समर्थक फिर से विरोध शुरू कर सकते हैं. बीबीसी संवाददाता का कहना है कि इराक़ी सरकार ने मुक़्तदा सद्र के ख़िलाफ़ भी कोई कार्रवाई नहीं की है और सद्र अभी भी वहाँ एक शक्तिशाली नेता बने हुए हैं. ईरान से संबंध इस बीच इराक़ ने अपने पड़ोसी देश ईरान के साथ संबंध बेहतर करने के प्रयास शुरू किए हैं. ईरान ने इराक़ में शिया विद्रोहियों के ख़िलाफ़ किसी सैनिक कार्रवाई का जमकर विरोध किया था. इराक़ की अंतरिम सरकार शिया बहुल ईरान की सरकार पर ये आरोप लगाया था कि वह इराक़ में शिया विद्रोहियों की मदद कर रहा है और उनको हथियार दे रहा है. मगर ईरान ने इससे हमेशा इनकार किया जिसके कारण दोनों देशों के बीच कटुता भी पनपी. अब इसी कटुता को दूर करने के लिए इराक़ के उपप्रधानमंत्री बर्हम सालेह ईरान का दौरा कर रहे हैं. उम्मीद की जा रही है कि तेहरान जाकर वे इराक़ के प्रधानमंत्री ईयाद अलावी की ईरान यात्रा का कोई कार्यक्रम बनाएँगे. मगर आलोचकों का मत है कि इराक़ी सरकार और अमरीका की नज़दीकी ईरान को इराक़ के नज़दीक आने से रोक सकती है. |
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