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मंगलवार, 12 जुलाई, 2005 को 15:09 GMT तक के समाचार
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सुकार्णोपुत्री हिंदू हैं या मुसलमान?
मेगावती सुकार्णोपुत्री
बीबीसी हिंदी के श्रोताओं और पाठकों की बहुत सी जिज्ञासाएँ ऐसी हैं जिनके बारे में वे हमसे सवाल करते हैं. ममता गुप्ता नियमित रूप से ऐसे ही कुछ सवालों का जवाब देती हैं...

प्रश्न : इंडोनेशिया की पूर्व राष्ट्रपति मेगावती सुकार्णोपुत्री हिंदू हैं या मुसलमान. नाम तो हिंदू लगता है. जमशेद अली, तेवड़ा मुज़फ़्फ़रनगर, उत्तर प्रदेश

उत्तर: इस नाम को हिंदू न कहकर संस्कृत मूल का कहना उचित होगा. वैसे आपको जानकर आश्चर्य होगा कि मेगावती नाम उड़ीसा के पूर्व मुख्यमंत्री और जाने माने स्वतंत्रता सेनानी बीजू पटनायक ने रखा था. उन्होंने इंडोनेशिया के स्वतंत्रता संग्राम में मदद की थी और वे प्रथम राष्ट्रपति सुकार्णो के गहरे मित्र थे.

सुकार्णोपुत्री मुसलमान हैं लेकिन इंडोनेशिया में आपको ऐसे सैकड़ों नाम मिलेंगे जिनका मूल संस्कृत में है और इसका कारण ये है कि ईसा से कोई एक हज़ार साल पहले भारतीय आर्यों ने इंडोनेशिया के द्वीपों में जाना शुरु कर दिया था. सन 78 में भारतीय राजकुमार अजि काक ने इंडोनेशिया में संस्कृत भाषा और पल्लव लिपि की शुरुआत की.

देवनागरी का भी प्रयोग हुआ. खुदाई में देवनागरी में उकेरे शिलालेख मिले हैं. आज भी इंडोनेशिया की राष्ट्रभाषा बहाशा इंडोनेशिया कहलाती है.

पहली शताब्दी से सातवीं शताब्दी तक भारत से लोग आकर बसते रहे और धीरे-धीरे हिंदू धर्म व संस्कृति का प्रसार हुआ. रीति रिवाज़, संगीत, नृत्य, वास्तुकला, धार्मिक अनुष्ठान, यहाँ तक कि वर्ण व्यवस्था भी इंडोनेशियाई समाज का अंग बन गई. पहली शताब्दी से सोलहवीं शताब्दी के बीच के काल को हिंदू राज्यों का काल कहा जाता है. तेरहवीं शताब्दी में मुसलमान व्यापारियों का आना जाना शुरु हुआ और इस्लाम का प्रचार प्रसार होने लगा.

प्रश्न: रोसैटा स्टोन क्यों प्रसिद्ध है? अजय कुमार, जोल्हनिया, सुपौल, बिहार

उत्तर: क्योंकि इस शिला पर ईसा से 196 साल पहले तीन लिपियों में मिस्र के सम्राट फ़ैरो का गुणगान उकेरा गया है. ये तीनों लिपियाँ उस काल में प्रचलित थीं. एक थी चित्रलिपि जिसका प्रयोग महत्वपूर्ण और धार्मिक दस्तावेज़ो के लिए किया जाता था. दूसरी थी लोकलिपि और तीसरी थी यूनानी लिपि क्योंकि यही उस समय मिस्र के शासकों की भाषा थी.

इस पत्थर का नाम रोसैटा इसलिए पडा क्योंकि यह एक छोटे से गाँव रोसैटा में हुई खुदाई में फ्रांसीसी सैनिकों को मिला था जो एक क़िले का पुनर्निर्माण कर रहे थे.

प्रश्न: रौबर्ट वॉलपॉल ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कब बने? संतोष कुमार वर्मा, बिहार शरीफ़

उत्तर: 1721 में. वॉलपॉल ने पच्चीस वर्ष की आयु में संसद में प्रवेश किया था और कई पदों पर रहे लेकिन उनके भाग्य का सितारा 1714 में चमका जब जॉर्ज प्रथम ने राजगद्दी संभाली. अगले बीस वर्षों तक वॉलपॉल ब्रिटेन के सबसे ज़्यादा प्रभावशाली राजनेता बने रहे.

वॉलपॉल इसलिए भी जाने जाते हैं क्योंकि ब्रिटेन के प्रधानमंत्री निवास 10 डाउनिंग स्ट्रीट को उन्होंने ही बसाया था. यह मकान संसद भवन से पाँच मिनट की दूरी पर है. सन 1742 में रॉबर्ट वॉलपॉल ने बिगड़ते स्वास्थ्य के कारण अपने पद से इस्तीफ़ा दे दिया. उनके योगदान को देखते हुए उन्हे अर्ल ऑफ़ ऑक्सफ़र्ड की पदवी से सम्मानित किया गया और वह 1745 में अपनी मृत्यु तक संसद के ऊपरी सदन हाउस ऑफ़ लॉर्ड्स के सदस्य बने रहे.

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