|
सोने के खरेपन का ठप्पा | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
बीबीसी हिंदी के श्रोताओं और पाठकों की बहुत सी जिज्ञासाएँ ऐसी हैं जिनके बारे में वे हमसे सवाल करते हैं. ममता गुप्ता नियमित रूप से ऐसे ही कुछ अनसुलझे सवालों का जवाब देती हैं... हॉलमार्क का ठप्पा लगाने का क्या अर्थ है? ये भारतीय है या विदेशी? जंगबहादुर सिंह और उमा सिंह, गोलपहाड़ी, जमशेदपुर हॉलमार्किंग बहुमूल्य धातुओं जैसे सोने, चाँदी और प्लेटिनम की क्वालिटी या गुणवत्ता आँकने का तरीक़ा है. हॉलमार्क शब्द Goldsmiths Hall या सुनार शाला से आया है जहाँ उत्पादों पर ठप्पा लगाया जाता था. हॉलमार्किंग का तरीक़ा बड़ा प्राचीन है और अलग अलग देशों में इसका अपने अपने ढंग से प्रयोग होता रहा है. भारत में सोने की खपत दुनिया में सबसे ज़्यादा है. हर वर्ष कोई 850 टन सोने का इस्तेमाल होता है जिसमें से अधिकांश आयात किया जाता है. एक लाख से ज़्यादा आभूषण निर्माता हैं. सोने की हॉलमार्किंग का काम भारतीय मानक ब्यूरो, निजी और सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों को सौंपता है. आभूषणों की गुणवत्ता आँकने के लिए पहले आभूषणों में से बेतरतीब ढंग से नमूने चुने जाते हैं, उन्हें मिलाकर गलाया जाता है और फिर उसकी शुद्धता का परीक्षण किया जाता है. भारत में आमतौर पर 22 कैरट सोने का इस्तेमाल किया जाता है. इसका मतलब ये कि सोना 91.6% होना चाहिए. अगर ऐसा है तो उस आभूषण पर 916 का ठप्पा लगा होगा. अभी भारत में ये ठप्पा लगाना ज़रूरी नहीं है लेकिन जिन ज़ेवरों पर ये लगा होता है उन्हें ख़रीदते हुए ग्राहक को ये भरोसा रहता है कि सोना बढ़िया है. ईरान का प्राचीन नाम क्या था? विजय प्रकाश, फ़तहगढ़, उत्तर प्रदेश
ईरान का प्राचीन नाम पार्स था और पार्स के रहने वाले लोग पारसी कहलाए, जो ज़रथुस्त्र के अनुयायी थे. सातवीं शताब्दी में अरबों ने पार्स पर विजय पाई और वहाँ इस्लाम का प्रचार प्रसार हुआ. उत्पीड़न से बचने के लिए बहुत से पारसी भारत आ गए. बड़े और पूजनीय लोगों के संबोधन के आगे जी क्यों लगाया जाता है? गौरव उपाध्याय, औरैया उत्तर प्रदेश ये आदरसूचक शब्द, संस्कृत के जित या युत शब्द से बना है. जित का प्राकृत रूप जिव होता है. शुभकामना के अर्थ में जित यानी आपकी जय हो आप विजयी हों. युत का प्राकृत रूप युक होता है जो हिंदी में आते-आते जू हो गया और कालांतर में जी में बदल गया. आज भी भारत की कई प्रादेशिक भाषाओं में, आदरसूचक शब्द जी के अर्थ में जू का प्रयोग किया जाता है, जैसे दाऊ जू, कहो जू यानी दाऊ जी, कहो जी. ब्रिटेन के शाही परिवार की व्यवस्था कब से चल रही है इसके प्रथम सम्राट कौन थे और उन्होंने कब से कब तक राज किया? सुभाष छावड़ा, रुद्रपुर, उत्तरांचल अगर इतिहास के पन्ने पलटकर देखें तो पता चलता है कि यह द्वीप समूह जिसे हम आज ब्रिटेन के नाम से जानते हैं छोटे-छोटे राज्यों में बंटा हुआ था. पड़ोसी आयरलैंड और यूरोप से आप्रवासियों के अलावा आक्रांता भी आते रहे और राजा अपने क्षेत्र की रक्षा के लिए ख़ुद ज़िम्मेदार था. नियंत्रण और प्रभुत्व के लिए इन राज्यों में लड़ाइयां भी होती रहीं. फिर सन 1603 में जब स्कॉटलैंड के राजा जेम्स षष्टम ने इंगलैंड की राजगद्दी भी हासिल कर ली तो वो ब्रिटेन के पहले सम्राट बने. उन्होंने 1625 तक राजकाज संभाला. यहाँ ये भी बता दें कि पिछले चार सौ साल में राजशाही में भारी परिवर्तन हुए हैं और सत्रहवीं शताब्दी के अंत होते-होते सम्राट के कार्यकारी अधिकार समाप्त हो गए और वह संवेधानिक राजा बनकर रह गए. | इससे जुड़ी ख़बरें बॉडी लेंगुएज क्या होती है?12 जुलाई, 2005 | पहला पन्ना दुनिया का सबसे बड़ा फूल12 जुलाई, 2005 | पहला पन्ना सौर मंडल का सबसे छोटा ग्रह10 मई, 2004 | पहला पन्ना हमें प्यास क्यों लगती है?06 मई, 2004 | पहला पन्ना | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
| ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||