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हमें प्यास क्यों लगती है? | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
बीबीसी हिंदी के श्रोताओं और पाठकों की बहुत सी जिज्ञासाएँ ऐसी हैं जिनके बारे में वे हमसे सवाल करते हैं. ममता गुप्ता नियमित रूप से ऐसे ही कुछ अनसुलझे सवालों का जवाब देती हैं... हमें प्यास क्यों लगती है? शिप्रा मुखर्जी, पुरी, उड़ीसा हमें प्यास इसलिए लगती है क्योंकि हमारे शरीर में पानी की कमी हो जाती है. हमारा शरीर जिन तत्वों से बना है उनमें दो तिहाई पानी है. पानी के बिना हम पाँच से दस दिन से ज़्यादा जीवित नहीं रह सकते. रोज़ कोई तीन लीटर पानी हमारे शरीर से निकल जाता है, आधा लीटर पसीने में, एक लीटर सांस छोड़ने में और डेढ़ लीटर पेशाब में. अगर हम रोज़ तीन लीटर पानी नहीं पिएंगे तो हमारे शरीर में पानी की कमी हो जाएगी. मतलब ये कि हमें 6 से 8 गिलास पानी रोज़ पीना चाहिए. इसमें चाय, कॉफ़ी और कोका कोला जैसे पेय शामिल नहीं हैं क्योंकि इनमें मौजूद कैफ़ीन दरस्ल पानी को सोख लेती है. हां दूध, फलों का रस या सब्ज़ियों का सूप पानी की कमी को अवश्य पूरा करते है. संसार का सबसे हल्का पदार्थ कौन सा है और इसकी खोज किसने की थी? प्रकाश चंद्र बिश्नोई, जालौर राजस्थान ऐरोजैल इस दुनिया का सबसे हल्का पदार्थ है. इसे अकसर ठोस धुंए की संज्ञा दी जाती है. क्योंकि ये देखने में पारदर्शी और धुंधले नीले रंग का होता है.
इसमें 99.8 प्रतिशत हवा होती है. अस्ल में ऐरोजैल एक सख़्त झाग है जिसे सिलिकॉन डाइऑक्साइड और रेत से बनाया जाता है. इन्ही पदार्थों से शीशा भी बनता है लेकिन ऐरोजैल शीशे के मुक़ाबले बहुत हल्का होता है. इसकी एक ख़ूबी ये भी है कि ये अपने से हज़ारों गुना ज़्यादा दबाव झेल सकता है और 1200 डिग्री सैल्सियस तापमान पर पंहुचकर ही पिघलता है. ऐरोजैल का आविष्कार सन 1932 में सैमुअल किसलर नाम के एक वैज्ञानिक ने किया था. मौनसैंटो कम्पनी ने ऐरोजैल के अधिकार ख़रीद कर इसे इन्सुलेटर की तरह प्रयोग किया. लेकिन इसकी ख़ासियतों को अस्ल में पहचाना द जैट प्रोपल्शन लैबोरेट्री ने और इसका प्रयोग अन्तरिक्ष यात्रा में किया जाने लगा. प्रसिद्ध वैज्ञानिक और लोकोपकारी जॉर्ज ईस्टमैन ने सन 1932 में आत्महत्या क्यों की? बरुण कुमार प्रभात, मधुबनी. बिहार ये जॉर्ज ईस्टमैन वही हैं जिन्होने ईस्टमैन कोडक कम्पनी शुरु की थी. उन्होने कई साल प्रयोग करने के बाद फ़ोटोग्राफ़ी के लिए ड्राईप्लेट्स बनाईं, फिर कैमरा की रील तैयार की और एक हल्का कैमरा भी बनाया. वर्ष1888 में जब ये कैमरा बाज़ार में आया तो ईस्टमैन ने नारा दिया आप बटन दबाइए बाक़ी हम करेंगे. ईस्टमैन एक बड़े आविष्कारक तो थे ही बड़े अच्छे इन्सान भी थे. उन्होने अपनी कम्पनी के कर्मचारियों की जैसी देखभाल की वह एक मिसाल थी. लेकिन सत्तर वर्ष पार करते करते एक ऐसी तकलीफ़ ने उन्हे जकड़ लिया जो ठीक नहीं हो सकती थी. उनकी स्पाइनल कॉर्ड के निचले हिस्से की कोशिकाएं सख़्त होती जा रही थीं और उनका चलना फिरना बंद हो रहा था. बस इसीलिए उन्होने 14 मार्च 1932 को आत्महत्या कर ली. जापान की राजधानी टोकियो किस नदी के किनारे बसी है? जबराराम राणा और हरजीराम राणा, जालौर, राजस्थान
टोकियो दुनिया के सबसे बड़े शहरों में से एक है और कई उपनगरों में बंटा है. इसलिए ये कहना ठीक नहीं होगा कि टोकियो शहर सुमिडा नदी के किनारे बसा है. हाँ बीसवीं शताब्दी तक यह नदी टोकियो शहर की मुख्य धमनी या जीवनधारा थी. इस नदी के ज़रिए ही माल आता जाता था. नौकाओं पर दावतें आयोजित की जाती थीं. गर्मी के मौसम में अब भी हर साल आतिशबाज़ी छोड़ी जाती है, उत्सव होता है. | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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