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दुनिया का सबसे बड़ा फूल | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
बीबीसी हिंदी के श्रोताओं और पाठकों की बहुत सी जिज्ञासाएँ ऐसी हैं जिनके बारे में वे हमसे सवाल करते हैं. ममता गुप्ता नियमित रूप से ऐसे ही कुछ अनसुलझे सवालों का जवाब देती हैं... दुनिया का सबसे बड़ा फूल कौन सा है और ये कहाँ पाया जाता है? जयप्रकाश, एटा, उत्तर प्रदेश दुनिया का सबसे बड़ा फूल है रैफ़लेसिया और ये दक्षिण पूर्वी एशिया के जंगलों में पाया जाता है. इसका नाम सिंगापुर के संस्थापक सर टॉमस स्टैम्फ़र्ड बिंगले रैफ़ल्स के नाम पर रखा गया था. ये फूल चितकबरे नारंगी भूरे रंग का होता है और इसमें से सड़ी हुई बदबू आती है. इसीलिए इसे 'स्टिंकिंग कॉर्प्स लिली' भी कहते हैं. यानी, सड़ी लाश वाली कुमुदनी. इसका व्यास तीन फ़ुट का हो सकता है और वज़न सात किलो. सबसे पहले किस वैज्ञानिक ने कहा था कि पृथ्वी सूर्य के चारों ओर चक्कर लगाती है? जगदीश विश्नोई बाड़मेर,रास्थान निकोलस कॉपरनिकस ने. कॉपरनिकस को आधुनिक खगोल विज्ञान का संस्थापक माना जाता है. सन 1530 में कॉपरनिकस ने अपनी रचना डि रिवोल्यूशनिबस पूरी की, जिसमें कहा गया था कि पृथ्वी अपनी धुरी पर रोज़ एक चक्कर लगाती है और सूर्य का चक्कर लगाने में उसे एक साल लगता है. उन्होंने ये नतीजा सालों के अध्ययन से निकाला जबकि तब तक दूरबीन का आविष्कार नहीं हुआ था और पश्चिमी जगत में ये मान्यता थी कि ब्रह्मांड एक गोलाकार बंद जगह है जिसके परे कुछ नहीं. पृथ्वी एक स्थिर पिंड है जो ब्रह्मांड के केंद्र में है और सभी खगोलीय पिंड जैसे सूर्य, चंद्रमा तारे उसका चक्कर काटते हैं. | इससे जुड़ी ख़बरें सौर मंडल का सबसे छोटा ग्रह10 मई, 2004 | पहला पन्ना हमें प्यास क्यों लगती है?06 मई, 2004 | पहला पन्ना | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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