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मंगलवार, 05 जुलाई, 2005 को 18:59 GMT तक के समाचार
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स्कॉटलैंड में प्रदर्शनकारियों की भीड़

प्रदर्शनकारी
विरोध करने वाले नए-नए तरीक़े अपना रहे हैं
जी आठ सम्मेलन के लिए कई तरह के प्रदर्शनकारी और सामाजिक या कल्याणकारी संस्थाओं के कार्यकर्ता स्कॉटलैंड की राजधानी एडिनबरा पहुँचे हुए हैं.

कुछ सरकार के साथ मिलकर काम करना चाहते हैं, कुछ उनपर दबाव बनाकर तो कुछ सरकारों से पूरी तरह निराश हो चुके हैं और अपना कड़ा विरोध उनको डराकर व्यक्त करते हैं.

एडिनबरा आए लोगों में कुछ तो इतने शाँत हैं कि उनके प्रदर्शन को विरोध प्रदर्शन कहना ग़लत होगा.

इन लोगों में शामिल हैं “मेक पावर्टी हिस्ट्री कैंपेन” यानी ग़रीबी को हमेशा के लिए ख़त्म कर देने का अभियान चलाने वाले संगठन.

आमतौर पर इन्हें किसी भी देश की सरकार से कोई आपत्ति नहीं है और न ही मंत्रियों को इनसे कोई परहेज़. ब्रिटेन के वित्त मंत्री गॉर्डन ब्राउन इनके कार्यक्रमों में भाषण देते हैं.

राजनीतिक महत्व

इनके साथ दिखना राजनीतिक महत्व भी रखता है, शायद इसीलिए रवांडा के वित्त मंत्री डॉनल्ड काबुरेका से लेकर अफ़्रीकी डेवलपमेंट बैंक के अगले अध्यक्ष बनने के दावेदार इनके साथ दिखना पसंद करते हैं.

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प्रदर्शनों में निशाने पर हैं धनी देशों के नेता

मेक पावर्टी हिस्ट्री अभियान से जुड़े हैं कुछ जाने माने संगठन जैसे सेव द चिल्ड्रन, एक्शन एड, ऑक्सफ़ैम और क्रिश्चियन एड.

फिर हैं इराक़ युद्ध को ग़लत मानने वाले “स्टॉप द वॉर कोअलिशन” के प्रदर्शनकारी जो बुश-ब्लेयर की इराक़ नीति के प्रबल विरोधी हैं.

इनके अलावा एक बड़ा गुट है पर्यावरणवादी कार्यकर्ताओं का. फ़्रेंड्स ऑफ़ द अर्थ संस्था के कार्यकर्ता कहते हैं कि वो दुनिया के अमीर देशों के आसपास बिछे सुरक्षा घेरे को भेदते हुए अपनी आवाज़ उन तक पहुँचाएँगे.

ये लोग आयोजित कर रहे हैं एक “क्लाइमेट अलार्म.” यानी जलवायु परिवर्तन के ख़तरों के प्रति लोगों को जागरूक करने और अमीर देशों की सरकारों को चेताने का काम – सड़कों पर अलार्म और घंटियाँ बजाकर.

इनके कुछ कार्यकर्ता अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश को किसी राक्षस से कम नहीं मानते क्योंकि उनका मानना है कि क्योटो संधि से लेकर अब तक बुश ने वो सब काम किए हैं जो पर्यावरण को नुक़सान ही पहुँचा सकता है.

इन लोगों का मानना है कि बुश पृथ्वी को सबसे बड़ा ख़तरा हैं.

लेकिन शायद सबसे मुश्किल है उन लोगों को ढूँढना और बात करना जो दुनिया के हर समाचार तंत्र को शक की नज़र से देखते हैं, उनसे बात करना पसंद नहीं करते, अपने फ़ोटो लिए जाना पसंद नहीं करते. ये हैं क्रांतिकारी जी आठ विरोधी कार्यकर्ता.

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