|
अमरीका पर फिर लगे आरोप | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
संयुक्त राष्ट्र के प्रताड़ना मामलों के विशेष अधिकारी का कहना है कि संयुक्त राष्ट्र को जानकारी मिली है कि अमरीका ने हिंद महासागर में तैनात अपने युद्धपोतों में संदेह के आधार पर कई लोगों को गुप्त रुप से बंदी बना रखा है. विशेष अधिकारी मैनफ़्रैड नोवाक ने बीबीसी को बताया कि विश्वसनीय सूत्रों द्वारा ऐसे कई आरोप लगाए गए हैं जिनके अनुसार अमरीका ने संदिग्ध चरमपंथियों को गुप्त स्थानों पर बंदी बना कर रखा हुआ है जिसमें अमरीकी युद्धपोत भी शामिल हैं. उन्होंने कहा कि रिपोर्टों के अनुसार यह जहाज़ हिंद महासागर में हैं. नोवाक का कहना था कि उनके पास इन आरोपों को साबित करने के लिए अभी तक सबूत नहीं हैं लेकिन गुप्त जेलों के यह इल्ज़ाम बहुत गंभीर हैं. नोवाक का कहना था कि अमरीका को इस मामले में संयुक्त राष्ट्र के साथ सहयोग करना चाहिए. उन्होंने कहा "यह अफवाहें हैं और मेरे विचार से प्रजातांत्रिक जवाब इसका यही होगा कि इन आरोपों की जाँच के लिए एक संपूर्ण और निश्पक्ष संयुक्त राष्ट्र जाँच की इजाज़त दी जानी चाहिए. " नोवाक का कहना था " हमें इन जगहों में जाने की अनुमति चाहे दी जाए या नहीं, जिसमें ग्वांतानामो बे भी शामिल हैं, हम एक संयुक्त जाँच शुरू कर रहे हैं और मानवाधिकार आयोग को उसकी रिपोर्ट देंगे क्योंकि यह संयुक्त राष्ट्र के लिए गंभीर चिंता का मामला है. " नोवाक ने अमरीका से मामले की जाँच में सहयोग देने के लिए कहा है और सभी जेलों के नाम और बंदियों की सूची की माँग की है. उन्होंने यह ज़रूर कहा कि अभी तक अमरीका ने संयुक्त राष्ट्र विशेषज्ञों को ग्वांतानामो बे जेल में जाने की इजाज़त नहीं दी है. |
| |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||