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सोमवार, 27 जून, 2005 को 01:15 GMT तक के समाचार
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अमरीकी सरकार की गंभीर आलोचना
अमरीकी पुलिस
सत्तर लोगों को ग्यारह सितंबर के हमलों के बाद गिरफ़्तार किया गया था
अमरीका के दो प्रमुख संगठनों ने सरकार पर आतंकवाद के ख़िलाफ़ लड़ाई के बहाने अनेक लोगों के साथ गंभीर अन्याय किए जाने के आरोप लगाए हैं.

मानवाधिकार संगठन ह्यूमन राइट्स वाच और अमेरिकन सिविल लिबर्टीज़ यूनियन का कहना है कि सितंबर 2001 के हमलों के बाद आतंकवादी होने के शक में गिरफ़्तार किए गए 70 लोगों को बिना कोई आरोप लगाए जेल में बंद रखा गया है, इनमें से एक व्यक्ति को छोड़कर बाक़ी सब मुसलमान हैं.

इन दोनों संगठनों ने अमरीकी न्याय विभाग की आलोचना करते हुए कहा है कि इन लोगों पर बेबुनियाद आरोप लगाए गए हैं और उन्हें अनिश्चत समय तक के लिए कैद कर दिया गया है.

दोनों मानवाधिकार संगठनों की रिपोर्ट में कहा गया है कि "हालाँकि अमरीकी अधिकारियों को शक है कि ये लोग आतंकवादी हैं लेकिन उन्हें संदिग्ध अपराधी के तौर पर नहीं बल्कि गवाह के रूप में जेल में बंद रखा गया है."

अमरीका के केंद्रीय क़ानून के तहत आपराधिक मामलों के उन गवाहों को हिरासत में रखा जा सकता है जिनके फ़रार हो जाने का अंदेशा हो, इसी क़ानून का प्रयोग इन 70 लोगों के मामले में किया जा रहा है.

दिलचस्प तथ्य यह भी है कि इनमें से लगभग आधे लोगों को कभी गवाही के लिए भी पेश नहीं किया गया है.

इन लोगों में से सिर्फ़ सात लोगों के ख़िलाफ़ अदालत में आतंकवाद के आरोप लगाए गए हैं.

इस रिपोर्ट में कहा गया है कि न्याय विभाग ने गिरफ़्तार किए गए लोगों के न्यायिक अधिकारों का भी ध्यान नहीं रखा.

मिसाल के तौर पर, उन्हें उनकी गिरफ़्तारी का कारण नहीं बताया गया, कई लोगों को वकील से संपर्क करने का मौक़ा नहीं दिया गया, कई लोगों को उनके ख़िलाफ़ बताए जाने वाले सबूत नहीं देखने दिए गए.

रिपोर्ट में कहा गया है कि इनमें से ज्यादातर लोगों को बंदूक की नोक पर गिरफ़्तार किया गया, एक छोटी कोठरी में बिल्कुल अकेले रखा गया और उनके साथ बुरा व्यवहार किया गया.

ये रिपोर्ट ऐसे समय में सामने आई है जबकि ग्वांतानामो बे बंदी शिविर में रखे गए लोगों के साथ बुरे बर्ताव की चर्चा गर्म है और उस अस्थायी कैदख़ाने को बंद करने की माँग उठ रही है.

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