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लेबनान में आज निर्णायक मतदान | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
लेबनान में आम चुनाव के तहत आज चौथे और अंतिम दौर का मतदान हो रहा है जिसके बाद इस बात का फ़ैसला हो सकेगा कि सीरिया विरोधी दलों को सत्ता में आने का मौक़ा मिल पाता है कि नहीं. लेबनान चुनाव में सीरिया विरोधी दलों के गठबंधन का नेतृत्व पूर्व प्रधानमंत्री रफ़ीक हरीरी के बेटे साद हरीरी कर रहे हैं. मगर सीरिया विरोधी गठजोड़ को सेना के पूर्व जनरल और पूर्व प्रधानमंत्री मिशेल आऊन के गठबंधन से कड़ी चुनौती मिल रही है जिसने कि पहले के दौर के मतदान में बढ़त लेकर सबको हैरान कर दिया था. लेबनान का ये आम चुनाव इस बार विशेष महत्व रखता है क्योंकि इस वर्ष सीरियाई सैनिकों के लेबनान से निकलने के बाद पहली बार वहाँ चुनाव हो रहे हैं.
उल्लेखनीय है कि सीरिया के सैनिक पिछले 30 वर्षों से लेबनान में मौजूद थे लेकिन इस वर्ष पूर्व प्रधानमंत्री रफ़ीक़ हरीरी की हत्या के बाद लेबनान में सीरिया का ज़बरदस्त विरोध शुरू हो गया. लेबनान में विरोध और अंतरराष्ट्रीय दबाव के कारण अंततः सीरिया ने लेबनान से अपनी सेना हटा ली. सीरिया ने 1989 में लेबनान में 15 वर्षों तक चले गृहयुद्ध की समाप्ति में भूमिका निभाई थी और गृहयुद्ध की समाप्ति के समय हुए समझौते के तहत ही उसके सैनिक लेबनान में बने हुए थे. चुनाव लेबनान में आज देश के उत्तरी हिस्से में मतदान हो रहा है.
लेबनान में मौजूद संवाददाताओं के अनुसार अनुमान यही है कि सुन्नी मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में साद हरीरी का गुट और ईसाई इलाक़ों में मिशेल आऊन का गुट आगे रहेगा. मिशेल आऊन ने वैसे तो गृहयुद्ध के समय सीरिया का विरोध किया था लेकिन चुनाव में कई ऐसे राजनेता उनका साथ दे रहे हैं जो सीरिया के क़रीबी समझे जाते हैं. साद हरीरी के गुट ने चुनाव में अभी तक जिन 100 सीटों का फ़ैसला हो चुका है उनमें 44 सीटें हासिल की हैं. सरकार बनाने के लिए उनके गुट को अंतिम चरण में लड़ी जानेवाली 28 में से 21 सीटों को जीतना आवश्यक होगा. वहीं मिशेल आऊन का गुट अगर अंतिम दौर में एक चौथाई सीटें भी हासिल कर लेता है तो हरीरी के गठबंधन की संसद में बहुमत पाने की योजना पर पानी फिर सकता है. |
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