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इराक़ में सुरक्षा स्थिति नहीं सुधरी | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीकी रक्षा मंत्री डोनल्ड रम्सफ़ेल्ड ने स्वीकार किया है कि आँकड़ों के लिहाज़ से इराक़ में सुरक्षा स्थिति 2003 में सद्दाम हुसैन शासन के ख़ात्मे के बाद से नहीं सुधरी है. बीबीसी से विशेष बातचीत में रम्सफ़ेल्ड ने कहा कि चरमपंथियों की सीमा पार आवाजाही, ख़ास कर ईरान और सीरिया से लगने वाली सीमा होकर आवाजाही पर रोक नहीं लग पाई है. सीरिया और ईरान को आड़े हाथों लेते हुए अमरीकी विदेश मंत्री ने कहा कि सीरिया चरमपंथियों की आवाजाही पर रोक लगाने के पूरे प्रयास नहीं कर रहा है, जबकि ईरान अपने पड़ोसी इराक़ की राजनीति में दखलअंदाज़ी दे रहा है. हालाँकि उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इराक़ में सेना का विस्तार हो रहा है और वहाँ चरमपंथियों को परास्त किया जा सकेगा. रम्सफ़ेल्ड ने काह कि इराक़ में चुनाव कराया जाना और वहाँ सरकार की स्थापना को बड़ी उपलब्धियों के रूप में देखा जाना चाहिए. अमरीकी रक्षा मंत्री ने कहा कि इराक़ में चरमपंथियों का मुक़ाबला करने से ज़्यादा ज़ोर सुरक्षा बलों को मज़बूत करने पर दिया जा रहा है. बीबीसी टेलीविज़न के के न्यूज़नाइट कार्यक्रम में उन्होंने कहा, "महत्वपूर्ण बात है इस बात पर ग़ौर करना कि चरमपंथियों को अमरीकी गठजोड़ सेना नहीं बल्कि इराक़ी जनता और इराक़ी सुरक्षा बल परास्त करेंगे. और ऐसा होगा क्योंकि इराक़ी जनतो को भरोसा हो चला है कि देश में उनका भविष्य है." इसबीच मंगलवार को इराक़ी शहर किरकुक में आत्मघाती बम हमले में कम से कम 22 लोग मारे गए हैं. इराक़ में छह सप्ताह पहले प्रधानमंत्री इब्राहिम जफ़ारी की सरकार बनने के बाद से चरमपंथी हमले में 900 से ज़्यादा लोग जान गँवा चुके हैं. |
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