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गुरुवार, 09 जून, 2005 को 12:20 GMT तक के समाचार
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बस्तियाँ हटाने को अदालती मंज़ूरी
यहूदी बस्तियों में रहने वाले लोगों का विरोध प्रदर्शन
बस्तियों में रहने वाले योजना का ज़ोरदार विरोध कर रहे हैं
इसराइली सुप्रीम कोर्ट ने ग़ज़ा पट्टी से यहूदी बस्तियाँ और उनकी सुरक्षा के लिए तैनात सेना को हटाने की सरकार की योजना को मंज़ूरी दे दी है.

इस तरह प्रधानमंत्री अरियल शेरॉन की ग़ज़ा से हटने की योजना पर अमल का रास्ता साफ़ हो गया है.

येरूशलम से बीबीसी संवाददाता बार्बरा प्लेट का कहना है कि इसे सरकार की बड़ी जीत के रूप में देखा जा रहा है.

ग़ज़ा पट्टी में रहने वाले यहूदियों ने सुप्रीम कोर्ट में अपील करके कहा था कि वहाँ से बस्तियों का हटाया जाना मानवाधिकारों का उल्लंघन है.

इसराइली सरकार ग़ज़ा पट्टी और पश्चिमी तट से चार बस्तियों को हटाने का काम अगस्त महीने से शुरू करना चाहती है लेकिन वहाँ रहने वाले लोग शेरॉन सरकार की इस योजना का कड़ा विरोध कर रहे हैं.

इन बस्तियों में रहने वाले लोगों का कहना है कि वे अपना संघर्ष जारी रखेंगे और ग़ज़ा पट्टी से नहीं हटेंगे.

सुप्रीम कोर्ट के ग्यारह में से दस जजों ने ग़ज़ा पट्टी से हटने की शेरॉन की योजना को क़ानूनी दृष्टि से उचित ठहराया, एक जज ने इस योजना को असंवैधानिक बताते हुए रद्द करने की बात कही.

इसराइल गज़ा पट्टी में रहने वाले सभी 8000 हज़ार इसराइली नागरिकों और उनकी सुरक्षा के लिए तैनात सैनिकों को हटाने जा रहा है लेकिन ग़ज़ा की सीमा, तट और वायुसीमा पर उसका नियंत्रण बना रहेगा.

इसके बाद पश्चिमी तट से चार बस्तियों को हटाने का काम भी शुरू होगा.

बस्तियों में रहने वाले लोगों के विरोध के बावजूद उन्हें हटाने की तैयारियाँ चल रही हैं, इसी सिलसिले में बुधवार को इसराइली रक्षा मंत्री शाउल मोफ़ाज़ और फ़लस्तीनी गृह मंत्री नासिर युसुफ़ के बीच बातचीत हुई.

इस बातचीत का उद्देश्य बस्तियाँ हटाने के समय ग़ज़ा पट्टी में क़ानून-व्यवस्था और सुरक्षा सुनिश्चित करना था.

विरोध

इसराइल के क़ानून मंत्री ज़िपी लिवनी ने अदालत के फ़ैसले का स्वागत किया है और कहा है कि इससे ग़ज़ा के बाशिंदों को पता चल गया होगा कि योजना रूकने वाली नहीं है.

 यह तो पूरी तरह से अपेक्षित था, कोई ताज्जुब की बात नहीं है, हम निराश नहीं हैं क्योंकि हमें कोई आशा भी नहीं थी
यहूदी बाशिंदों के वकील

लेकिन ग़ज़ा पट्टी में रहने वाले यहूदियों का कहना है कि उन्हें इस फ़ैसले पर कोई ताज्जुब नहीं हुआ है और वे अपना विरोध जारी रखेंगे.

यहूदी बाशिंदों के वकील ने कहा, "यह तो पूरी तरह से अपेक्षित था, कोई ताज्जुब की बात नहीं है, हम निराश नहीं हैं क्योंकि हमें कोई आशा भी नहीं थी."

यह फ़ैसले ऐसे समय में आया है जबकि ग़ज़ा पट्टी में इसराइली सैनिकों और फ़लस्तीनी चरमपंथियों के बीच पिछले कुछ दिनों में कई झड़पें हुई हैं.

इसराइली रेडियो के मुताबिक़, बुधवार को फ़लस्तीनी गृह मंत्री के साथ हुई बैठक में इसराइली रक्षा मंत्री ने माँग की है कि इसराइली ठिकानों पर मोर्टार हमले बंद हों और हथियार ग़ज़ा पट्टी में न पहुँचें.

ग़ज़ा पट्टी और पश्चिमी तट से बस्तियाँ हटाने के फ़ैसले को इसराइली जनता का समर्थन हासिल रहा है लेकिन हाल के दिनों में हुए जनमत सर्वेक्षण दिखाते हैं कि इस समर्थन में गिरावट आ रही है.

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