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ग़ज़ा पर शेरॉन को मिला समर्थन | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
ग़ज़ा और पश्चिमी तट के कुछ हिस्सों से सैनिकों को हटाने के मामले में इसराइली संसद ने प्रधानमंत्री शेरॉन के विरोधियों के प्रस्ताव को नामंज़ूर कर दिया है. सत्ताधारी लिकुद पार्टी में प्रधानमंत्री शेरॉन के विरोधियों ने संसद में प्रस्ताव रखा था कि सैनिकों की वापसी के सवाल पर जनमत संग्रह कराया जाना चाहिए. ग़ज़ा पट्टी और पश्चिमी तट के कुछ हिस्सों से इसराइली सैनिकों को जुलाई तक हटाने के मामले पर शेरॉन को संसद का समर्थन हासिल है, शेरॉन का कहना है कि विरोधी उनकी "योजना में देरी कराने के लिए जनमत संग्रह का बहाना बना रहे हैं." शेरॉन ने संसद में बहस के दौरान कहा, "हमें बहुमत हासिल है." राजनीति शेरॉन विरोधियों की उम्मीद कट्टरपंथी शास पार्टी के ग्यारह सदस्यों पर टिकी थी जो सैनिकों की वापसी के निर्णय का विरोध करती है. लेकिन शास पार्टी जनमत संग्रहों के पक्ष में भी नहीं थी क्योंकि उसे लगता है कि जनमत संग्रह से उनकी राजनीतिक महत्ता कम होती है. पिछले सप्ताह इसराइल की तीसरी सबसे बड़ी पार्टी शिनुई ने शेरॉन के बजट को समर्थन देने की घोषणा की है, बजट पर मतदान मंगलवार को होना है. अगर 31 मार्च तक बजट पारित नहीं हो पाता है तो इसराइली संविधान के अनुसार वहाँ चुनाव कराए जाएँगे और ग़ज़ा से सैनिकों की वापसी की प्रक्रिया भी रूक जाएगी या धीमी पड़ेगी. इसराइल में कराए गए ज़्यादातर जनमत संग्रह बताते हैं कि ज़्यादातर इसराइली नागरिक ग़ज़ा पट्टी को छोड़ने के पक्ष में हैं, इस इलाक़े पर इसराइल ने 1967 के युद्ध के बाद क़ब्ज़ा कर लिया था. शेरॉन के प्रस्ताव के मुताबिक़ ग़ज़ा में रहने वाले यहूदी और उनकी रक्षा के लिए तैनात सैनिक इस वर्ष जुलाई तक वहाँ से हट जाएँगे लेकिन इसराइल ग़ज़ा की अंतरराष्ट्रीय सीमा, वायु सीमा और समुद्र तट पर अपना नियंत्रण रखेगा. |
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