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शनिवार, 15 जनवरी, 2005 को 07:55 GMT तक के समाचार
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महमूद अब्बास ने शपथ ली
महमूद अब्बास
अमरीका और इसराइली नेताओं में बेहतर छवि है अब्बास की
नवनिर्वाचित फ़लस्तीनी राष्ट्रपति महमूद अब्बास आज रमल्लाह शहर में एक समारोह में राष्ट्रपति पद की शपथ ले ली है.

माना जा रहा है कि अब्बास बड़े ही मुश्किल समय में राष्ट्रपति पद ग्रहण कर रहे हैं. क्योंकि इसराइल ने गुरुवार को गज़ा पट्टी में चरमपंथी हमले के बाद फ़लस्तीन से सारे संबंध तोड़ने की घोषणा की है.

अब्बास की जीत के सिर्फ चार दिन बाद ही फ़लस्तीनी चरमपंथियों ने गज़ा पट्टी में आत्मघाती हमला कर छह इसराइली नागरिकों को मार डाला था.

इसराइली अधिकारियों का कहना है कि अब्बास को ऐसे चरमपंथी हमले रोकने के लिए कदम उठाने चाहिए.

उदारवाद छवि वाले अब्बास ने शुरु से ही फ़लस्तीनी चरमपंथियों से निपटने के लिए बातचीत का रास्ता अपनाने पर जोर दिया है.

अब्बास के चुने जाने के बाद इसराइली प्रधानमंत्री एरियल शेरॉन ने उन्हें बधाई दी थी और मुलाक़ात की उम्मीद भी जताई थी लेकिन शुक्रवार को इन उम्मीदों पर पानी फिर गया.

शेरॉन के प्रवक्ता असफ शरिव ने कहा " इसराइल ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय को बता दिया है कि जब तक अब्बास चरमपंथियों से निपटने के लिए कड़े कदम नहीं उठाते तब तक उनसे मुलाक़ात नहीं हो सकती."

फ़लस्तीनी कैबिनेट मंत्री साएब इराकात ने इस ख़बर की पुष्टि की है.

इराकात ने कहा " हम इसराइल से आग्रह करते हैं कि शांतिपूर्ण बातचीत की प्रक्रिया शुरु करे क्योंकि बातचीत से ही हिंसा के इस ख़तरनाक चक्र को रोका जा सकता है."

यरुशलम में बीबीसी संवाददाता जेम्स रेनॉल्डस का कहना है कि पिछले वर्षों की हिंसा को देखते हुए शनिवार को होने वाला समारोह अब्बास के लिए खुशियों का एक छोटा सा मौका होगा.

नयी शुरुआत

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गज़ा में हमले के बाद शेरॉन का रवैया कड़ा

अब्बास का शपथ ग्रहण फ़लस्तीनी लोगों के लिए नयी शुरुआत कर सकता है लेकिन फिलहाल अब्बास के पास ऐसा कुछ भी नहीं है जिसके आधार पर वह फ़लस्तीनियों को उम्मीद बंधा सकें.

पिछले कुछ वर्षों में फ़लस्तीनियों ने ऐसे नेता देखे हैं जिन्हें इसराइल ने या तो कोई मान्यता नहीं दी या फिर उनकी उपेक्षा की.

हालांकि जानकार मानते हैं कि अराफ़ात की मौत से ये स्थिति बदल सकती है.

बीबीसी संवाददाता के अनुसार उम्मीदें बहुत है मगर अब्बास के काम शुरु करने के पहले दिन ही फ़लस्तीनियों को समझ में आ रहा है कि अब्बास के प्रति भी इसराइल का रवैया कमोबेश वैसा ही है जैसा पूर्व के फ़लस्तीनी नेताओं के साथ रहा है.

गज़ा पट्टी पर हुए हमले के बाद इसराइल ने कड़ा रवैया अपनाया है.

इस हमले की ज़िम्मेदारी अब्बास के फतह आंदोलन से जुड़े रहे चरमपंथी संगठन अल अक्सा शहीदी ब्रिगेड ने ली है. इसमें तीन फ़लस्तीनी चरमपंथी भी मारे गए थे.

अब्बास ने हमले के बाद कहा था कि ऐसे हमलों से शांति प्रक्रिया को कोई लाभ नहीं होगा.

अब्बास अब उम्मीद कर रहे हैं कि वो चरमपंथियों को युद्धविराम के लिए मना सकेंगे.

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