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पीएलओ ने की हमले रोकने की माँग | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
फ़लस्तीनी मुक्ति संगठन(पीएलओ) ने चरमपंथी संगठनों से इसराइल के ख़िलाफ़ हमले बंद करने का आग्रह किया है. यासिर अराफ़ात के निधन के बाद इस सबसे स्पष्ट अपील में संगठन की प्रमुख निर्णायक समिति ने कहा है कि उन सारी कार्रवाइयों को रोका जाना चाहिए जो कि राष्ट्रीय हित को नुकसान पहुँचाते हों. यह अपील इसराइली प्रधानमंत्री अरियल शेरॉन के इस आदेश के कुछ ही घंटों बाद आया है कि इसराइली सेना कोई भी कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र है. एक बयान में पीएलओ की कार्यकारी समिति ने कहा है कि नवनिर्वाचित फ़लस्तीनी राष्ट्रपति महमूद अब्बास के भाषण में की गई इस अपील को उसका पूरा समर्थन है कि राष्ट्रीय हितों को नुकसान पहुँचाने वाली सारी कार्रवाइयों पर रोक लगनी चाहिए. इससे पहले अब्बास ने कहा है कि वह सोमवार को ग़ज़ा पट्टी जाएँगे और फ़लस्तीनी चरमपंथी को इसराइलियों पर हमले न करने के बारे में मनाने की कोशिश करेंगे. रमल्लाह में राष्ट्रपति पद की शपथ लेने के बाद महमूद अब्बास ने अपील की कि हिंसा के ख़तरनाक दौर ख़त्म किया जाए. लेकिन उनके शपथ लेने के समारोह पर ताज़ा हिंसा के बादल मंडराते रहे और इसराइली सेना ने ग़ज़ा पट्टी में सात फ़लस्तीनियों को मार दिया. इससे पहले इसराइल ने गुरुवार को गज़ा पट्टी में इसराइलियों के ख़िलाफ़ हुए चरमपंथी हमले के बाद फ़लस्तीन से सारे संबंध तोड़ने की घोषणा की. अब्बास की जीत के सिर्फ चार दिन बाद ही फ़लस्तीनी चरमपंथियों ने गज़ा पट्टी में आत्मघाती हमला कर छह इसराइली नागरिकों को मार डाला था. इसराइली अधिकारियों ने ज़ोर देकर कहा कि अब्बास को ऐसे चरमपंथी हमले रोकने के लिए कदम उठाने चाहिए. उदारवादी छवि वाले अब्बास ने शुरु से ही फ़लस्तीनी चरमपंथियों से निपटने के लिए बातचीत का रास्ता अपनाने पर ज़ोर दिया है. |
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