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इसराइल की फ़लस्तीनी नेता को चेतावनी | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
इसराइल ने फ़लस्तीनियों को चेतावनी दी है कि अगर चरमपंथियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई नहीं की गई तो शांति के लिए पुनः जारी हुए प्रयासों से हाथ खींच लेगा. इसराइल के प्रधानमंत्री अरियल शेरोन ने अपने मंत्रिमंडल की साप्ताहिक बैठक में फलस्तीनी नेता महमूद अब्बास को मध्य पूर्व शांतिप्रक्रिया के भविष्य के बारे में चेतावनी दी है. शेरॉन ने फ़लस्तीनी नेता महमूद अब्बास से कहा कि जब तक वे फलस्तीनी चरमपंथी गुटों और उनके तंत्र को नष्ट करने के लिये कोई क़दम नहीं उठाएँगे तब तक शांतिप्रक्रिया में कूटनीतिक तौर पर कोई तरक्की नहीं हो सकती. तीन हफ्ते पहले मिस्र में दोनों पक्षों के बीच संघर्षविराम पर सहमति हुई थी मगर तेल अवीव में शुक्रवार को एक क्लब में हुए आत्मघाती हमले में चार लोगों के मारे जाने के बाद संघर्षविराम पर संकट आ गया था. इसराइल का रूख़ इसराइल इस हमले के लिए इस्लामिक जिहाद को ज़िम्मेदार मानता है और यही वजह है कि अरियल शेरॉन ये चाहते हैं कि फ़लस्तीनी नेता महमूद अब्बास इस गुट के ख़िलाफ तुरंत कार्रवाई करें. महमूद अब्बास अपनी तरफ़ से ये दिखा चुके हैं कि वे चरमपंथियों पर अंकुश लगाना चाहते हैं. लेकिन इसराइल ये पहले भी स्पष्ट कर चुका है कि उसे ज़्यादा इंतज़ार की आदत नहीं है. ऐसी स्थिति में हो सकता है कि इसराइल या तो फलस्तीनी चरमपंथियों पर या फिर सीरिया को निशाने पर ले सकता है, और ख़ास तौर पर इन नये हालात में, जबकि अमरीका भी सीरिया विरोधी भाषा बोल रहा है. फ़लस्तीनी रवैया सऊदी अरब के विदेश मंत्री सउद अल फ़ैसल ने बीबीसी को एक इंटरव्यू में मध्यपूर्व शांति प्रक्रिया में महमूद अब्बास के प्रयासों की जहां सराहना की, वहीं इसराइल के रवैए को निराशाजनक बताया. सउद अल फ़ैसल ने कहा,"महमूद अब्बास शांति प्रक्रिया में एक सुलझे हुये वार्ताकार के तौर पर दिखाई देते हैं लेकिन दूसरी तरफ हम देखते हैं, कि तस्वीर बिल्कुल निराशाजनक है, जहां अरियल शेरॉन जैसे नेता हैं, जो शांति के किसी भी क़दम को मंज़िल तक पहुंचने ही नहीं देते." लेकिन जहाँ तक महमूद अब्बास का सवाल है, वे ये मानते हैं कि इस हमले के लिये कोई कथित बाहरी ताक़त ही ज़िम्मेदार है जो शांति प्रक्रिया को आघात पहुँचाना चाहती है. लेकिन ये बाहरी ताक़त कौन हो सकती है इसके बारे में पक्के तौर पर कुछ नहीं कहा जा सकता. यहाँ ये उल्लेखनीय है कि ऐसा कहा जाता है कि फलस्तीनी हथियार बंद गुट सीरिया या लेबनानी हेज़बुल्ला गुट से वित्तीय मदद और निर्देश लेते हैं. शक इसराइल को भी है लेकिन सीरिया ने अपनी तरफ से इन आरोपों से इंकार किया है. |
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