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24 यहूदी बस्तियाँ नष्ट करने की घोषणा | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
इसराइली कैबिनेट ने पश्चिमी तट की उन 24 यहूदी बस्तियों को नष्ट करने का फ़ैसला किया जिन्हें बिना सरकार की अनुमति के बनाया गया था. ये सभी बस्तियाँ अरियल शेरॉन के प्रधानमंत्री पद संभालने के बाद बनाई गईं हैं. इस सप्ताह के शुरू में एक सरकारी रिपोर्ट आई थी, जिसमें विस्तार से यह बताया गया था कि कैसे सरकारी नीति के ख़िलाफ़ वहाँ 105 बस्तियाँ बनाईं गईं हैं. रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि सरकार के कई मंत्रालयों ने इसराइली क़ानून का उल्लंघन करते हुए न सिर्फ़ बस्तियों के निर्माण में आर्थिक मदद की बल्कि इनका समर्थन भी किया. अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नज़र में पश्चिमी तट और गज़ा पट्टी की सभी इसराइली बस्तियाँ ग़ैर क़ानूनी हैं. रिपोर्ट में उन बस्तियों को ग़ैर क़ानूनी बताया गया है जिनका निर्माण 1990 के दशक के मध्य में हुआ. इन इलाक़ों में 100 से ज़्यादा बस्तियाँ फैल गई. अक्सर ऐसी बस्तियाँ छोटी होने के साथ-साथ टूटी-फूटी और जर्जर भी होती हैं. चुनौती लेकिन इन बस्तियों ने फ़लस्तीनियों को एक स्वतंत्र देश बनने की दिशा में चुनौती थी जो पश्चिमी तट में एक ही सीमा चाहते हैं.
इसराइल की अरियल शेरॉन सरकार पर इस बात के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय का बड़ा दबाव है कि वह इन बस्तियों को नष्ट करे. इसराइली सरकार के सूत्रों का कहना है कि सरकार ने इस रिपोर्ट को स्वीकार कर लिया है और मार्च 2001 के बाद बनी 24 बस्तियों को नष्ट पर भी सहमति व्यक्त की है. रिपोर्ट में की गई अन्य सिफ़ारिशों के बारे में एक मंत्रिमंडलीय समिति विचार-विमर्श करेगी. लेकिन अभी भी ये स्पष्ट नहीं हो पाया है कि वर्ष 2001 से पहले बनी 80 या उससे ज़्यादा बस्तियों का क्या होगा. बीबीसी संवाददाता जॉनी डायमंड का कहना है कि प्रधानमंत्री अरियल शेरॉन के लिए पश्चिमी तट की इन यहूदी बस्तियों को नष्ट करने का फ़ैसला ठीक उलटा क़दम है. कई वर्षों तक वे बस्तियों के विस्तार को लेकर उत्साहित रहे हैं. |
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