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मध्य पूर्व में लोकतंत्र पर अंतरराष्ट्रीय बैठक | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
मध्य पूर्व में लोकतंत्र को मज़बूत बनाने के लिए मोरक्को में लगभग 30 देशों के प्रतिनिधियों के बीच चर्चा होनेवाली है जिसके लिए अमरीकी विदेश मंत्री कॉलिन पॉवेल रबात पहुँच गए हैं. बैठक में उत्तरी अफ़्रीका की राजनीतिक स्थिति के बारे में भी चर्चा होगी. ये बैठक दुनिया के आठ अमीर देशों के संगठन जी-8 ने आयोजित की है. बैठक अमरीका की अगुआई में शुरू हुई उस विवादास्पद योजना का हिस्सा है जिसके तहत अमीर राष्ट्र लोकतंत्र और मानवाधिकार की स्थिति बेहतर करने के बदले में उनको आर्थिक सहायता देने की बात है. कॉलिन पॉवेल ने कहा है कि अमरीका अरब राष्ट्रों पर बदलाव थोपना नहीं चाहता और उन देशों को स्वयं सुधारों की गति तय करनी होगी. मगर कुछ आलोचकों ने अमरीका के इरादे पर संदेह जताते हुए अमरीका पर खुल्लमखुल्ला दख़लंदाज़ी करने का आरोप लगाया है. अमरीका ने इस वर्ष मार्च में इस योजना को सामने रखा था मगर अरब राष्ट्रों की ओर से विरोध के स्वर आने के बाद इस योजना के तेवर कम कर दिए गए. बैठक में भाग लेनेवालों में पाकिस्तान, मिस्र, बहरीन, कुवैत, इराक़, लेबनान, लीबिया, सऊदी अरब और फ़लस्तीनी नेता भी शामिल हैं. |
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