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गुरुवार, 10 जून, 2004 को 06:49 GMT तक के समाचार
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मध्य पूर्व में लोकतंत्र का वादा
शिराक़ और बुश
इराक़ में नैटो सैनिक भेजने पर फ्रांसीसी राष्ट्रपति शिराक़ बुश से सहमत नहीं हैं
अमरीका के जॉर्जिया में दुनिया के आठ प्रमुख देशों का जी-8 शिखर सम्मेलन मध्य पूर्व में लोकतंत्र को बढ़ावा देने और अफ्रीकी देशों को कर्ज़ से मुक्ति दिलाने के आह्वान के साथ समाप्त हो गया.

इस सम्मेलन के मेज़बान जॉर्ज बुश ने कहा कि मध्य पूर्व में बदलाव की हवा बह रही है और लोग इस बात पर सहमत हो रहे हैं कि सुधारों की ज़रूरत है.

जी-8 के नेताओं ने तय किया है कि अगले दो वर्ष तक अफ्रीका के देशों को कर्ज़ से राहत दिलाने का कार्यक्रम जारी रहेगा.

इन नेताओं ने अफ्रीका में तैनाती के लिए हज़ारों शांति रक्षक सैनिकों को प्रशिक्षित करने का भी फ़ैसला किया है.

जी-8 के सदस्य देश
ब्रिटेन
फ्रांस
जर्मनी
इटली
कनाडा
अमरीका
जापान
रूस

जॉर्जिया से बीबीसी संवाददाता का कहना है कि दुनिया के आठ औद्योगिक देशों का यह शिखर सम्मेलन एक ख़ुशनुमा सम्मेलन था जिसमें कोई ख़ास विवाद नहीं दिखा.

लेकिन जो मतभेद के मुद्दे हैं वे अपनी जगह बने रहे, मिसाल के तौर पर इराक़ के मामले में फ्रांस के राष्ट्रपति अपने रूख़ पर कायम रहे.

फ्रांस ने इराक़ में नैटो के और सैनिकों को भेजने का प्रस्ताव रखा था जिसे फ्रांस ने पूरी तरह से नकार दिया, बाद में राष्ट्रपति बुश ने भी मान लिया कि उनका प्रस्ताव 'व्यवहारिक नहीं' था.

कर्ज़

ग़रीब अफ्रीकी देशों को भारी कर्ज़ के बोझ से मुक्ति दिलाने के लिए जारी योजना को 2006 के अंत तक चलाने का फ़ैसला किया गया है.

कर्ज़ मुक्ति में सहायता के लिए जिन 27 देशों को चुना गया है उनमें से 23 अफ्रीकी देश हैं.

पहले तय किया गया था कि उन देशों में लगभग 100 अरब डॉलर कर्ज़ माफ़ किया जाएगा जहाँ शांति और स्थायित्व है लेकिन अब तक सिर्फ़ 31 अरब डॉलर कर्ज़ ही माफ़ किया गया है.

 यह दान देने का मामला नहीं है, यह अमीर देशों के भी हित में है, जब तक पूरे कर्ज़ माफ़ नहीं होते अफ्रीका की मदद नहीं होगी
ओलुसेगुन ओबासांजो

ज़ाहिर है, इस स्थिति से अफ्रीकी देशों के नेता ख़ुश नहीं हैं, नाइजीरिया के ओलुसेगुन ओबासांजो ने कहा, "यह दान देने का मामला नहीं है, यह अमीर देशों के भी हित में है, जब तक पूरे कर्ज़ माफ़ नहीं होते अफ्रीका की मदद नहीं होगी. "

इसके अलावा अमरीकी राष्ट्रपति ने अल्जीरिया, घाना, सेनेगल, दक्षिण अफ्रीका और यूगांडा के नेताओं से भी 75 हज़ार शांति सैनिकों के प्रशिक्षण और तैनाती पर चर्चा हुई.

एड्स और एचआईवी से निबटने के लिए शोध को और तेज़ करने के बारे में भी बातचीत की गई है.

जी-8 ने सूडान में जारी हिंसा और मानवाधिकारों के उल्लंघन के मामले में भी चिंता प्रकट की.

सम्मेलन के शामिल फ्रांस और जर्मनी के नेताओं ने कहा कि भारत और चीन को भी जी-8 के बैठकों में शामिल किया जाना चाहिए.

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