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लेबनान में दूसरे दौर का मतदान | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
लेबनान में संसदीय चुनाव के लिए रविवार को दूसरे दौर में देश के दक्षिणी हिस्से में मतदान हो रहा है. चार दौर में होने वाले इस मतदान में पहले दौर का मतदान पिछले रविवार को हुआ था और बाक़ी दो दौर अगले दो रविवारों को होंगे. लेबनान में पिछले क़रीब तीस साल के इतिहास में पहली बार सीरियाई सैनिकों की ग़ैरमौजूदगी में चुनाव हो रहे हैं. ग़ौरतलब है कि लेबनान से सीरियाई सैनिक हाल ही में वापस हटाए गए हैं. पिछले रविवार को राजधानी बेरूत में हुए पहले दौर के मतदान में सभी 19 सीटें सीरिया विरोधी उम्मीदवारों ने जीती थीं. लेकिन लेबनान के दक्षिणी हिस्से में हो रहे दूसरे दौर के मतदान में सीरिया समर्थक उम्मीदवारों के भारी जीत हासिल करने की संभावना है. इस्लामी छापामार संगठन हिज़बुल्लाह ने उदारवादी मानी जाने वाली शिया पार्टी अमल के साथ मिलकर अपने उम्मीदवार चुनाव मैदान में उतारे हैं और दोनों के कुल 23 उम्मीदवार अपनी चुनावी क़िस्मत आज़मा रहे हैं. शिया पार्टी अमल का नेतृत्व नबीह बैरी करते हैं जो संसद के स्पीकर भी हैं और वह सीरिया समर्थक लड़ाका रहे हैं. हिज़बुल्लाह के बारे में कहा जाता है कि उसने पाँच साल पहले लेबनान के दक्षिणी हिस्से से इसराइली सेना को भगाने में कामयाबी हासिल की थी. बेरूत में बीबीसी संवाददाता किम घटास का कहना है कि लेबनान के दक्षिणी हिस्से में शिया संगठन - अमल काफ़ी मज़बूत है जिसे सीरिया का समर्थन हासिल है इसलिए वह राजनीति में भी अच्छी दख़ल रखता है. अमल-हिज़बुल्ला गठबंधन के 23 में से छह उम्मीदवारों ने पहले ही जीत हासिल कर ली है क्योंकि उनके मुक़ाबले कोई खड़ा ही नहीं हुआ था और वह निर्विरोध विजयी घोषित कर दिए गए. कुछ ईसाई बहुल इलाक़ों में मतदान के बहिष्कार का भी आहवान किया गया क्योंकि उन इलाक़ों में लोग हिज़बुल्ला के बढ़ते प्रभाव से चिंतित हैं. |
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