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अब्बास और बुश की मुलाक़ात | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
फ़लस्तीनी नेता महमूद अब्बास और अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश आज वाशिंगटन में मुलाक़ात कर रहे हैं जिसमें मध्य पूर्व शांति प्रक्रिया पर बातचीत हो होगी. माना जा रहा है कि महमूद अब्बास इस ऐतिहासिक मुलाक़ात में फ़लस्तीनी प्राधिकरण को अमरीकी आर्थिक सहायता की मांग कर सकते हैं. महमूद अब्बास पहले फ़लस्तीनी अध्यक्ष हैं जिन्हें व्हाइट हाउस में आमंत्रित किया गया है. उन्होंने बुधवार को अमरीकी संसद को बताया कि 17 जुलाई के संसदीय चुनावों को टालने की उनकी कोई योजना नहीं है. अमरीकी सांसद इन चुनावों को टालने के पक्ष में हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि चुनाव स्वतंत्र और निष्पक्ष नहीं होंगे. अब्बास के मुख्य विरोधी चरमपंथी गुट हमास का आरोप है कि फ़लस्तीन नेता मतदान को टालना चाहते हैं ताकि वो अपने समर्थन को बढ़ा सकें. महमूद अब्बास ने अमरीकी संसद से अनुरोध किया कि वह सीधे फ़लस्तीनी प्राधिकरण को सहायता दे. लेकिन अमरीकी राजनेता ऐसा करने के पक्ष में नहीं हैं. वे फ़लस्तीनी प्राधिकरण पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाते रहे हैं और वे ग़ैरसरकारी संगठनों को सहायता राशि देना पसंद करते हैं. हटाने में देरी दूसरी ओर इसराइल के प्रधानमंत्री अरियल शेरॉन ने इस बात की पुष्टि की है कि गज़ा पट्टी से यहूदी बस्तियों और सैनिकों को हटाने की योजना में देरी होगी. अब यहूदी बस्तियों को हटाने की योजना अगस्त के मध्य तक लागू नहीं पाएगी क्योंकि इस समय यहूदी 'तिशा बे अव' के तहत शोक मनाते हैं. पहले गज़ा से यहूदी बस्तियों को हटाने और सैनिकों की वापसी की तारीख़ 25 जुलाई तय की गई थी. दूसरी ओर इसराइल के विदेश मंत्री सिल्वन शैलोम ने कहा है कि अगर चरमपंथी संगठन हमास जुलाई में होने वाला फ़लस्तीनी संसदीय चुनाव जीत लेता है, तो गज़ा योजना पर फिर से विचार करना ज़रूरी हो सकता है. |
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