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'फ़लस्तीनी योजना प्रभावित करने वाली' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
नवनियुक्त अंतरराष्ट्रीय दूत जेम्स वूल्फेंसन ने फ़लस्तीनी नेताओं से मिलने के बाद कहा है कि गज़ा पट्टी से इसराइल की प्रस्तावित वापसी के बाद अर्थव्यस्था को सुधारने की फ़लस्तीनियों की योजना से वे काफ़ी प्रभावित हैं. वूल्फ़ेंसन ने पश्चिमी तट के शहर रमल्ला में फ़लस्तीनी नेताओं से मुलाक़ात की. वूल्फ़ेंसन को गज़ा से इसराइलियों की वापसी के लिए समन्वय का ज़िम्मा दिया गया है. वे संयुक्त राष्ट्र, यूरोपीय संघ, रूस और अमरीका के एक ग्रुप का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं. एक महीने के अंदर इसराइल प्रधानमंत्री अरियल शेरॉन की योजना के तहत गज़ा से हज़ारों यहूदी बस्तियाँ हटाना शुरू कर देगा. विश्व बैंक के पूर्व अध्यक्ष जेम्स वूल्फ़ेंसन सोमवार को इसराइली अधिकारियों से मिलेंगे और इसके बाद वे मंगलवार को गज़ा पट्टी के लिए रवाना हो जाएँगे. ज़रूरत गज़ा पट्टी में क़रीब 15 लाख फ़लस्तीनी रहते हैं. यह शहर सिर्फ़ 40 किलोमीटर लंबा है और दुनिया के सबसे भीड़-भाड़ वाले स्थानों में से एक है. इस समय क़रीब सात हज़ार यहूदी लोगों ने इसका एक चौथाई हिस्सा अपने नियंत्रण में ले रखा है. फ़लस्तीनियों को इसकी सख़्त ज़रूरत है. गज़ा से यहूदी बस्तियाँ हटने के बाद फ़लस्तीनियों को इसराइलियों से उच्च तकनीक वाली खेती-बाड़ी की परियोजना भी विरासत में मिलेंगी. लेकिन इसराइली इसकी सीमा पर अपना ही नियंत्रण रखेंगे. अभी यह स्पष्ट नहीं हो पाया है यहूदी लोगों के उन सैकड़ों घरों का क्या होगा जो वे छोड़कर वापस लौटेंगे. हालाँकि इसराइली सरकार को इस बात की चिंता है कि शायद इन घरों पर फ़लस्तीनी चरमपंथी गुट हमास नियंत्रण कर ले. इस कारण शायद ये हो कि इसराइल सैनिक बुलडोजर से इन घरों को नष्ट कर दें. दूसरी ओर फ़लस्तीनी अधिकारियों को डर है कि कहीं इसराइली सैनिकों के गज़ा से हटते ही फ़लस्तीनी लूटपाट न शुरू कर दें क्योंकि फ़लस्तीनियों के लिए इसराइली बस्तियाँ घृणा का प्रतीक हैं. |
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