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करीमोव ने बाहरी जाँच की माँग ठुकराई | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
संयुक्त राष्ट्र के अनुसार उज़्बेकिस्तान के राष्ट्रपति इस्लाम करीमोव ने पिछले हफ़्ते उज़्बेकिस्तान में सरकार विरोधी प्रदर्शनकारियों के मारे जाने की घटना की अंतरराष्ट्रीय जाँच की माँग ठुकरा दी है. उधर उज़्बेक सेना ने सीमावर्ती नगर करासू पर दोबारा नियंत्रण हासिल कर लिया है. करासू में स्थानीय नागरिकों के प्रदर्शन के बाद लोगों ने स्थानीय नेतृत्व को हटा दिया था. विद्रोही नेता बख़्तियार रहीमोव को गिरफ़्तार कर लिया गया है. वे करासू में इस्लामी राज स्थापित करना चाहते थे. अंदिजान में प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाए जाने की घटना के बाद करासू में भी विद्रोह शुरू हो गए थे. बीस हज़ार की आबादी वाले शहर के लोगों ने अधिकारियों और पुलिसकर्मियों को खदेड़ दिया था. अंदिजान में विद्रोह की शुरूआत तब हुई जब स्थानीय लोगों ने एक जेल पर हमला करके 23 बंदियों को छुड़ा लिया था. जेल में रखे गए लोग व्यापारी थे जिनके ऊपर इस्लामी चरमपंथी होने का आरोप था. 'इतना काफ़ी है' संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार अयुक्त लुई अर्बर का कहना था कि राष्ट्रपति करीमोव ने संयुक्त राष्ट्र महासचिव कोफ़ी अन्नान को बताया कि विदेशी संवाददाताओं और राजनयिकों को अंदिजान जाने देना काफ़ी है. मानवाधिकार अयुक्त लुई अर्बर ने बीबीसी को बताया कि उन्होंने राष्ट्रपति करीमोव से कहा कि इतने कम समय की संवाददाताओं और राजनियकों की अंदिजान यात्रा तथ्यों की पुष्टि करने के लिए पर्याप्त नहीं थी. उनका कहना था कि उज़्बेक लोगों और अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ बेहतर सलूक होना चाहिए. मावाधिकार संगठनों का कहना है कि हो सकता है कि हिंसा के दौरान एक हज़ार तक निहत्थे लोग मारे गए हों. उज़्बेकिस्तान की सरकार का अनुमान है कि 170 लोग मारे गए. |
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