|
मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
उज़बेकिस्तान के पूर्वी शहर अंदिजान में शुक्रवार को प्रदर्शनकारियों पर हुई गोलीबारी के एक दिन बाद एक बार फिर क़रीब 15 हज़ार लोग शहर के मुख्य चौक पर इकट्ठा हो गए हैं. शुक्रवार की गोलीबारी के बाद प्रदर्शनकारी अब राष्ट्रपति इस्लाम करिमोव के त्यागपत्र की मांग कर रहे हैं. अंदिजान के निवासियों को आशंका है कि शुक्रवार को प्रदर्शनकारियों पर सरकारी सैनिकों की गोलीबारी में 300 लोग मारे गए हैं. राष्ट्रपति इस्लाम करिमोव ने घटना के लिए मुस्लिम चरमपंथियों को ज़िम्मेदार ठहराया है. राजधानी ताशकंद में एक संवाददाता सम्मेलन में करिमोव ने कहा कि शुक्रवार को गोलीबारी में 20 से ज़्यादा लोग मारे गए हैं. दूसरी ओर रूसी समाचार एजेंसी के अनुसार उज़बेकिस्तान के उसी इलाक़े के एक अन्य शहर इलिचेवस्क से भी गड़बड़ी की ख़बरें हैं. अंदिजान में शुक्रवार मध्यरात्रि से एकाएक बदले घटनाक्रम में हथियारबंद लोगों ने शहर की जेल पर धावा बोलकर हज़ारों क़ैदियों को छुड़ा लिया था. उसके बाद हज़ारों लोग शहर के मुख्य चौक पर इकट्ठा हो गए और स्वतंत्रता के समर्थन में नारेबाज़ी की. लेकिन सरकारी सेना ने प्रदर्शन को कुचलने के लिए लोगों पर गोलीबारी की. जिसमें बड़ी संख्या में लोगों के मारे जाने की आशंका है. संख्या शनिवार की सुबह एक बार फिर अंदिजान के सैकड़ों लोग सड़कों पर उतर आए और सरकार विरोधी नारे लगाए. ख़बर है कि गोलीबारी में मारे गए लोगों के शव अभी भी सड़कों पर पड़े हैं. लेकिन अभी भी यह बताना मुश्किल है कि शुक्रवार की गोलीबारी में कितने लोग मारे गए. आधिकारिक स्तर पर अभी भी सिर्फ़ नौ लोगों के मारे जाने की बात कही जा रही है लेकिन स्थानीय लोगों के मुताबिक़ मरने वालों की संख्या सैकड़ों में है. बीबीसी संवाददाता का कहना है कि शुक्रवार को हिंसा उस समय भड़की जब सरकारी सैनिकों ने प्रदर्शनकारियों की भीड़ पर गोलियाँ चलाईं. हालाँकि प्रदर्शनकारी शांति से अपना विरोध व्यक्त कर रहे थे. दरअसल ये प्रदर्शन कुछ स्थानीय लोगों के समर्थन में हो रहा था जिनमें से 23 स्थानीय व्यवसायी हैं. सरकार ने चरमपंथी गतिविधियों के आरोप में इन्हें गिरफ़्तार किया था. शुक्रवार मध्यरात्रि को जेल पर हुए हमले के बाद हज़ारों क़ैदियों को छुड़ा लिया गया था. प्रतिक्रिया अमरीकी विदेश मंत्रालय ने हिंसक घटनाओं के बाद किसी भी पक्ष को दोषी नहीं ठहराया और कहा प्रदर्शनकारियों व सरकार को संयम बरतना चाहिए.
उज़बेकिस्तान अमरीका का एक प्रमुख सहयोगी और अमरीका के वहाँ सैनिक अड्डे भी हैं चाहे वह समय-समय पर उज़बेकिस्तान की मानवाधिकारों के हनन के मुद्दे पर आलोचना भी करता रहा है. व्हाइट हाउस के एक प्रवक्ता ने कहा कि उज़बेक लोकतांत्रिक सरकार चाहते हैं लेकिन वह शांतिपूर्ण ढंग से कायम होनी चाहिए. दूसरी ओर रूस ने पूरी तरह उज़बेक राष्ट्रपति इस्लाम कैरिमोव का समर्थन किया है. अंदिजान उज़बेकिस्तान के महत्वपूर्ण शहरों में से एक है. यहीं फ़ेरग़ाना घाटी का इलाक़ा है जिसकी आबादी ज़्यादा है और यहाँ के लोग अपनी स्वतंत्र परंपरा के लिए जाने जाते हैं. अंदिजान इस घाटी के लोगों की भावनाओं का केंद्र रहा है और इससे प्रभावित भी रहा है. सरकार भी इस घाटी को हमेशा संदेह की दृष्टि से देखती है. यहाँ के हज़ारों स्थानीय लोगों को सरकार ने बंद कर रखा है और उन पर चरमपंथ को बढ़ावा देने के आरोप हैं. |
| ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||