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पूर्व ब्रितानी राजदूत विवाद के घेरे में | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
उज़बेकिस्तान में ब्रिटेन के पूर्व राजदूत क्रेग मर्री ने कहा है कि उन्हें अपना पद इसलिए गँवाना पड़ा क्योंकि उन्होंने उन ख़ुफ़िया सूचनाओं के इस्तेमाल की आलोचना की थी जिन्हें उज़बेकिस्तान में कथित तौर पर प्रताड़ना के ज़रिए हासिल किया गया. मर्री ने कहा है कि उन्होंने एक गुप्त सूचना सरकार को भेजी थी जिसमें दावा किया था कि ब्रिटेन की ख़ुफ़िया एजेंसी एमआई-6 ने उन ख़ुफ़िया सूचनाओं का इस्तेमाल किया था, यह बात पिछले सप्ताह एक अख़बार को पता चल गई थी. क्रेग मर्री ने बीबीसी को बताया कि ब्रिटेन के विदेश मंत्रालय ने 'ग़लत' अनुशासनात्मक आरोपों के आधार पर एक साल पहले ही इस्तीफ़ा देने के लिए मजबूर किया था. लेकिन विदेश मंत्रालय ने इन आरोपों का खंडन किया है और कहा है कि क्रेग मर्री को कुछ विभागीय कारणों से हटाया गया है. विदेश मंत्रालय ने कहा कि राजदूत क्रेग मर्री वरिष्ठ अधिकारियों और सहयोगियों का भरोसा खो चुके थे इसलिए उन्हें इसी सप्ताह उज़बेकिस्तान से वापस बुला लिया गया. आरोप लेकिन 45 वर्षीय मर्री का कहना है कि वे जो कुछ सूचनाएँ लंदन भेज रहे थे, उनके लिए अधिकारी उन्हें एक साल से हटाने की कोशिश कर रहे थे. ऐसे ही एक पत्र में मर्री ने दावा किया था कि ख़ुफ़िया एजेंसी एमआई-6 ने एक ऐसी ख़ुफ़िया सूचना का इस्तेमाल किया जो उसे अमरीकी ख़ुफ़िया एजेंसी सीआईए ने दी थी लेकिन दरअसल वे सूचनाएँ उज़बेकिस्तान के कथित प्रताड़ना कमरों में हासिल की गई थीं. इसी तरह का एक पत्र ब्रिटेन के अख़बार फ़िनेंशियल टाइम्स में प्रकाशित हुआ था जिसमें मर्री ने लिखा था कि प्रताड़ना के ज़रिए हासिल की गई सूचना का इस्तेमाल "नैतिक, व्यावहारिक और क़ानूनी तौर पर ग़लत है."
मर्री ने बीबीसी के रेडियो-4 के टुडे कार्यक्रम से कहा, "मेरा ख़याल है कि मुझे अपनी अंतरात्मा की आवाज़ सुनने के लिए यह ख़ामियाजा भुगतना पड़ा है. मैंने अपने विचार खुले रूप में रखे लेकिन सिर्फ़ विभाग के अंदर ही." क्रेग मर्री ने कहा, "मैंने अपने विचार फ़िनेंशियल टाइम्स को अपने विचार लीक नहीं किए लेकिन यही कारण मेरी बर्ख़ास्तगी की वजह बना." क्रेग मर्री ने कहा, "इस मामले से ऐसे ठोस संकेत जाते हैं कि आतंकवाद के ख़िलाफ़ लड़ाई शुरू होने के बाद से ऐसे हालात बन गए हैं कि अगर कोई विभाग के अंदर ही निष्पक्ष तौर पर अपने विचार व्यक्त करे तो उसके रोज़गार के लिए भारी ख़तरा पैदा हो सकता है." मर्री ने कहा कि उन्हें अगस्त 2003 में भी लंदन बुलाया गया था और उनके व्यवहार के बारे में ऐसे 18 आरोप लगाए गए थे जिनका कोई आधार नहीं था, और एक सप्ताह के भीतर इस्तीफ़ा देने की धमकी दी गई थी. विदेश मंत्रालय ने क्रेग मर्री के दावों के बारे में इंटरव्यू देने से इनकार कर दिया लेकिन एक बयान में कहा कि मर्री को अनुशासनात्मक आधार पर नहीं बल्कि "विभागीय कारणों" से हटाया गया है. |
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