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हज़ारों उज़्बेक किर्गिस्तान की ओर भागे | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
उज़्बेकिस्तान में चल रही हिंसा से डर कर भाग रहे हज़ारों लोग पड़ोसी देश किर्गिस्तान की सीमा पर जमा हो गए हैं. उज़्बेकिस्तान से किर्गिस्तान को जाने वाले सभी रास्ते बंद हैं लेकिन किरगिस्तान के अधिकारियों का कहना है कि सैकड़ों लोग फिर भी सीमा पार करने में कामयाब हो गए हैं. अधिकारियों का कहना है कि वे सोच-विचार कर रहे हैं कि अन्य लोगों को भी किरगिस्तान की सीमा में आने दिया जाए या नहीं. सीमा पर उज़्बेक नगर इलिचेस्क-कारासु में शर्णार्थियों और उज़्बेकिस्तान की पुलिस के बीच झड़पें हुई हैं और कई सरकारी इमारतों को आग लगा दी गई. राष्ट्रपति इस्लाम करीमोव ने प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाए जाने की घटना के बाद पहली बार बोलते हुए कहा कि देश में इस्लामी कट्टरपंथी ताक़तें अस्थिरता फ़ैला रही हैं और इस्लामी राष्ट्र कायम करना चाहती हैं. शुक्रवार को पुलिस की गोलियों से मारे जाने वाले लोगों की सही संख्या के बारे में अनुमान ही लगाए जा रहे हैं, मरने वालों की संख्या 300 तक बताई जा रही है, शुक्रवार की गोलीबारी के बावजूद शनिवार को भी बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी शहर के मुख्य चौराहे पर जमा हुए. राष्ट्रपति करीमोव ने सिर्फ़ इतना कहा है कि शुक्रवार की घटना में दस सैनिक मारे गए हैं लेकिन उन्होंने मारे गए प्रदर्शनकारियों की संख्या नहीं बताई. काफ़ी समय से चल रहे शांतिपूर्ण प्रदर्शन अचानक हिंसक हो उठे, इस्लामी चरमपंथ को बढ़ावा देने के आरोप में गिरफ़्तार किए गए 23 व्यापारियों की रिहाई की माँग को लेकर ये प्रदर्शन हो रहे थे. राष्ट्रपति करीमोव ने प्रदर्शनों को "इस्लामी चरमपंथियों की शह पर हुए सशस्र विद्रोह' की संज्ञा दी जिनका 'उद्देश्य सरकार का तख़्तापलट' करना था, राष्ट्रपति का कहना है कि स्थिति पूरी तरह से नियंत्रण में है. करीमोव ने कहा, "इन लोगों का मक़सद नफ़रत फैलाना और धर्मनिरपेक्षता के ज़रिए हो रही प्रगति को रोकना है, जिसे हम स्वीकार नहीं कर सकते." राष्ट्रपति का कहना था कि सरकारी सेना को गोलीबारी करने के आदेश नहीं दिए गए थे, लेकिन प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि उज़्बेक सैनिकों ने निहत्थे प्रदर्शनकारियों पर गोलियाँ चलाईं. |
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