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अंदिजान से शरणार्थियों का पलायन जारी | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
हिंसा से प्रभावित उज़्बेक शहर अंदिजान में सैनिकों ने कुछ इलाक़ों की घेराबंदी जारी रखी है. शुक्रवार को इस शहर में सैनिकों ने प्रदर्शनकारियों पर गोलियाँ चलाई थी. स्थानीय लोगों का कहना है कि शहर के पुराने इलाक़े के निकट बाज़ार और मुख्य मस्जिद के निकट अभी भी तीन बख़्तरबंद गाड़ियाँ और बड़ी संख्या में सैनिक मौजूद हैं. इस बीच हज़ारों की संख्या में उज़बेक शरणार्थी हिंसाग्रस्त अंदिजान शहर छोड़कर पड़ोसी देश किर्गिस्तान की ओर भाग रहे हैं. किर्गिस्तान में अधिकारियों ने 500 से ज़्यादा लोगों को अपने देश में आने की अनुमति दे दी है. इनमें से कई लोग घायल हैं. ज़िम्मेदारी किर्गिस्तान की सीमा से लगे करासू शहर में शरणार्थियों और उज़्बेक पुलिस में भिड़ंत हुई और कई सरकारी इमारतों को आग लगा दी गई.
राष्ट्रपति इस्लाम करीमोव ने घटना के लिए मुस्लिम चरमपंथियों और अपराधियों को ज़िम्मेदार ठहराया है. उन्होंने कहा कि ये लोग उनकी सरकार को अपदस्थ करना चाहते हैं. अंदिजान में पत्रकारों को जाने की अनुमति नहीं है लेकिन राजधानी ताशकंद से बीबीसी संवाददाता का कहना है कि अंदिजान के लोग अपने परिजनों को दफ़ना रहे हैं और वे राष्ट्रपति के बयान से काफ़ी नाराज़ हैं. अभी भी ये पता नहीं चल पाया है कि शुक्रवार को प्रदर्शनकारियों पर हुई गोलीबारी में कितने लोग मारे गए हैं लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि गोलीबारी में सैकड़ों लोग मारे गए हैं. शुक्रवार को हुई घटना के बाद शनिवार को हज़ारों की संख्या में लोग एक बार फिर अंदिजान की सड़कों पर इकट्ठा हुए लेकिन हिंसा की कोई घटना नहीं हुई. उज़्बेक सरकार का कहना है कि अंदिजान शहर पर उसका नियंत्रण बना हुआ है. हालाँकि शनिवार को जुटी भीड़ ने सरकार विरोधी नारे लगाए और राष्ट्रपति करीमोव के त्यागपत्र की मांग भी की. |
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