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कुवैती महिलाओं को राजनीतिक अधिकार | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
कुवैत की संसद ने महिलाओं को राजनीतिक अधिकार देने के पक्ष में मतदान किया है. कुवैती निर्वाचन क़ानूनों में हुए संशोधन के बाद अब वहाँ की महिलाएँ पहली बार मतदान कर सकेंगी. इसके साथ-साथ वे संसदीय और स्थानीय चुनावों में हिस्सा भी ले सकेंगी. इस संशोधन के पक्ष में 35 मत पड़े जबकि 23 मत विरोध में पड़े. कुवैत में इसी साल परिषद चुनाव होने हैं. संसद में स्पीकर ने जब इस संशोधन को पास किए जाने के पक्ष में नतीजा सुनाया तो दर्शक दीर्घा में बैठे लोगों ने इसका तालियों से स्वागत किया. इस गैलरी में संशोधन के समर्थक भी जमा हुए थे. प्रधानमंत्री शेख़ सबह अल-अहमद अल-सबह ने कहा, "मैं राजनीतिक अधिकार मिलने पर कुवैत की महिलाओं को बधाई देता हूँ." बहस कुवैत के शासक शेख़ जाबिर अल-अहमद अल-सबह ने 1999 में महिलाओं को राजनीतिक अधिकार दिए जाने का आदेश जारी किया था. क़रीब 10 घंटे तक चले संसद के सत्र के बाद इस क़ानून में संशोधन पर सहमति हो पाई. पहले कबीलाई और कट्टरपंथी सदस्यों ने इस संशोधन को पास नहीं होने दिया था. इनमें से कई सदस्यों का तर्क था कि इस्लामी क़ानून महिलाओं को नेतृत्व वाला पद देने से रोकता है. हालाँकि इस संशोधन में इस बात का उल्लेख है कि महिला मतदाता या उम्मीदवार इस्लामी क़ानून से बँधी होंगी. बीबीसी संवाददाताओं का कहना है कि यह कट्टरपंथी सदस्यों को मनाने की कोशिश लगता है. |
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