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सद्दाम को समर्थन के लिए माफ़ी माँगी | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
वरिष्ठ फ़लस्तीनी नेता महमूद अब्बास ने कुवैत पर इराक़ी हमले के दौरान सद्दाम हुसैन को फ़लस्तीनी समर्थन के लिए माफ़ी माँगी है. अब्बास ने कुवैत दौरे पर आने के बाद रविवार को माफ़ी माँगी. पिछले 14 वर्षों में यह पहला मौक़ा है जब कोई वरिष्ठ नेता कुवैत के दौरे पर आया है. 1990 में कुवैत पर इराक के हमले के बाद फ़लस्तीनियों के साथ कुवैत की नाराज़गी इसलिये हुई थी क्यों कि यासिर अराफ़ात उस वक्त उन अरब नेताओं में से एक थे जिन्होंने सद्दाम हुसैन को समर्थन दिया था. इसकी वजह से कुवैत से हज़ारों फ़लस्तीनियों को निकाल दिया गया औऱ यासिर अराफ़ात को कई खाड़ी देशों के समर्थन से हाथ धोना पड़ा. मेल-मिलाप महमूद अब्बास की कुवैत यात्रा उसी विवाद को दूर करने के एक प्रयास के रूप में देखी जा रही है. कुवैत हवाई अड्डे पर पहुंचते ही अब्बास ने सीधे-सीधे कहा कि हमने तब जो कुछ भी किया उसके लिये हम कुवैत और उसकी जनता से माफ़ी मांगते हैं. हालांकि कुवैत सरकार ने पहले ही ये कह दिया था कि माफ़ी मांगने की ज़रूरत नहीं है. वैसे कुछ कुवैती क़ानूनविदों ने सरकार की इस बात के लिये आलोचना की कि औपचारिक माफ़ी के बग़ैर अब्बास को कुवैत आने की इजाज़त ही क्यों दी गई. महमूद अब्बास ने अपनी अरब यात्रा मेल मिलाप के संदेश के साथ शुरू की है जिसके तहत एक हफ्ते पहले वे सीरिया गये थे. वहाँ उन्होंने फ़लस्तीनी नेतृत्व और सीरिया सरकार के बीच एक अरसे से चले आ रहे विवाद के निपटारे की दिशा में एक पहल की है. |
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