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अपने ही देश के दूतावास पर हमला | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
कुवैत में बांग्लादेश के दूतावास पर बांग्लादेशी नागरिकों ने हमला बोलकर काफ़ी तोड़फोड़ की है. कुवैत में बांग्लादेश के राजदूत नज़रूल इस्लाम ख़ान ने बीबीसी को बताया कि इस तोड़फोड़ में दो बांग्लादेशी नागरिकों को भी चोटें आई हैं जो अपने किसी काम से दूतावास गए थे. दूतावास ने स्थिति बिगड़ते देखकर पुलिस बुला ली जिसने कई बांग्लादेशी नागरिकों को गिरफ़्तार कर लिया जो कुवैत में मेहनत-मज़दूरी करने वाले लोग हैं. बांग्लादेश के राजदूत का कहना है कि इन लोगों को उनकी कंपनी के मालिकों ने कई महीनों से तनख़्वाह नहीं दी थी जिससे नाराज़ होकर उन्होंने दूतावास में तोड़फोड़ की. कुवैती दूतावास में तैनात एक सुरक्षाकर्मी ने बताया कि इन लोगों दूतावास के फ़र्नीचर और शीशे तोड़े डाले और फ़ाइलें फाड़ दीं. सफ़ाई के कामकाज का ठेका लेने वाली कुवैती कंपनी के कर्मचारियों का कहना है कि उन्हें पिछले पाँच महीने से वेतन नहीं दिया गया है. दूतावास के ज़्यादातर कर्मचारी हमले से डरकर भाग खड़े हुए और पास के पुलिस स्टेशन में शरण ली, दूतावास के अधिकारियों ने बताया है कि किसी कर्मचारी को कोई चोट नहीं आई है. कुवैत से बीबीसी संवाददाता का कहना है कि दूतावास में मामूली सुरक्षा थी इसलिए ये प्रदर्शनकारी आसानी से इमारत के अंदर दाख़िल हो गए. एक अनुमान के मुताबिक़ खाड़ी देशों में लगभग डेढ़ लाख बांग्लादेशी नागरिक काम करते हैं. इनमें से ज़्यादातर लोग मेहनत-मज़दूरी की छोटी-मोटी नौकरियाँ करते हैं ताकि अपने परिवार का भरण-पोषण कर सकें लेकिन आम तौर पर उनसे बहुत अधिक काम लिया जाता है और उनके अधिकार बहुत ही सीमित हैं. खाड़ी के देशों में न सिर्फ़ बांग्लादेश बल्कि भारत सहित कई दक्षिण एशियाई देशों के कामगार मज़दूरी करते हैं और वे अक्सर अपने देश के दूतावासों शिकायत करते हैं कि उन्हें मज़दूरी नहीं मिल रही या उनके साथ मालिक दुर्व्यवहार करते हैं. खाड़ी में काम करने वाले दक्षिण एशियाई कामगारों की हालत पर लगातार चिंता व्यक्त की जाती रही है लेकिन उनकी दशा में पिछले कई दशकों से कोई सुधार नहीं हुआ है. |
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