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मंगलवार, 03 फ़रवरी, 2004 को 14:18 GMT तक के समाचार
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प्रवासी नेपालियों की मुश्किलें

बॉलीवुड अभिनेत्री मनीषा कोइराला
मनीषा कोइराला प्रवासी नेपालियों के साथ
खाड़ी क्षेत्र में रहने वाले क़रीब तीन लाख़ नेपाली लोग दूतावास सेवाओं के मामले में बड़ी कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं.

नेपालियों की इतनी बड़ी संख्या होने के बावजूद खाड़ी में सिर्फ़ तीन नेपाली दूतावास हैं- रियाद, दोहा और क़ाहिरा.

संयुक्त अरब अमीरात के क़रीब अस्सी हज़ार प्रवासी नेपाली वहाँ दूतावास न होने की वह से बहुत मुश्किलों का सामना कर रहे हैं.

ऐसे में दुबई स्थित नेपाली समाज ही उनकी मुश्किलें कुछ कम करने की कोशिश कर रहा है.

नेपाली समाज इन मुश्किलों को दूर करने की कोशिश के साथ-साथ दुबई में नेपाली दूतावास खुलवाने के लिए भी आठ साल से संघर्ष कर रहा है.

नेपाली समाज के मुखिया चंद्र प्रसाद सापकोटा ने इसके लिए हस्ताक्षर अभियान भी चलाया है.

सपकोता कहते हैं, "हम नेपाली नागरिकों को पेश आने वाली समस्याओं को सुलझाने के लिए अपने स्तर पर पूरी कोशिश करते हैं."

"यहाँ तक कि जब रियाद के दूतावास के कर्मचारी दुबई के नेपालियों के पासपोर्ट से संबंधित काम निबटाने के लिए दुबई आते हैं तो उनके ठहरने वग़ैरह का इंतज़ाम भी नेपाली समाज ही करता है."

वेतन भी कम

प्रवासी नेपालियों की सबसे बड़ी समस्या वेतन से जुड़े शोषण की है. कुछ स्थानीय कंपनियाँ कभी-कभी मज़दूरों और कर्मचारियों को पूरा वेतन नहीं देते.

ऐसे में सापकोटा नेपालियों को उनका हक़ दिलाने में मदद करते हैं.

नेपाली सम्मेलन

नेपाली समाज के पास ऐसी शिकायतें भी आई हैं जिनमें फर्जी एजेंट नौकरी देने के बहाने लोगों को बुलाकर संयुक्त अरब अमीरात में छोड़ जाते हैं.

एक प्रवासी नेपाली मणि कुमार श्रेष्ठ के ख़िलाफ़ जब से ऐसी ही शिकायत आई तो नेपाली समाज ने उसे सज़ा दिलवाई.

ऐसे ख़बरें भी मिलती हैं कि इस तरह के एजेंट कुछ लड़कियों को वहाँ लाकर वेश्यावृत्ति के धंधे में धकेल देते हैं.

चूँकि संयुक्त अरब अमीरात में कोई नेपाली दूतावास नहीं है इसलिए नेपाली समाज को ही पंचायत की भूमिका निभानी पड़ती है.

वीज़ा

एक अन्य नेपाली प्रवासी चंद्र सिंह अदाई कहते हैं, "दूतावास नहीं होने से ग़रीब और कम पढ़े लिएक लोगों को बहुत मुश्किल होती है."

"सिर्फ़ आज की तारीख़ में संयुक्त अरब अमीरात में लगभग 500 नागरिक ऐसे हैं जिन्हें घूमने-फिरने वाले वीज़ा पर लाया गया है और उनके पास काम करने का वीज़ा नहीं है."

अदाई कहते हैं कि ये मुश्किलें यहीं ख़त्म नहीं होतीं. ऐसे लोगों को अगर कंपनियाँ नौकरी करने का प्रमाण पत्र देने के लिए राज़ी भी हो जाती हैं तो इसके लिए उन्हें अपने दस्तावेज़ प्रमाणित कराने की ज़रूरत होती है और दूतावास नहीं होने की हालत में इसमें बहुत मुश्किल आती है.

प्रवासी नेपाली
क़रीब तीन लाख नेपाली खाड़ी देशों में रहते हैं

"यह सिर्फ़ रियाद या काठमांडू में ही हो सकता है."

मीना भंडारी काठमांडू में पैदा हुईं और अमरीका के लॉस एंजल्स में पढ़ाई की. उन्होंने एक पाकिस्तानी से शादी कर ली.

उनके पति शारजाह में अमरीकी विश्वविद्यालय में शिक्षक हैं.

मीना भंडारी का कहना था, "मुझे अभी तक कोई मुश्किल नहीं हुई है और उसकी वजह शायद ये है कि हमारे पास अमरीका का ग्रीन कार्ड है."

"लेकिन अगर आगे कभी समस्या हुई तो दूतावास नहीं होने की वजह से बहुत मुश्किल हो सकती है."

इन्हीं सब परेशानियों को ध्यान में रखते हुए नेपाल सरकार ने अबू धाबी में दूतावास खोलने का निर्णय तो ले लिया है लेकिन यह कब तक खुलेगा इस बारे में अभी कुछ साफ़ नहीं है.

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