| लिएन चान और हु जिन्ताओ की मुलाक़ात | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
चीनी राष्ट्रपति हु जिन्ताओ और ताइवान के विपक्षी नेता लिएन चान ने दोनों देशों के बीच तनाव को कम करने के लिए सहयोग का फ़ैसला किया है. शुक्रवार को एक संयुक्त बयान में दोनों नेताओं ने ताइवान की स्वतंत्रता का विरोध करने और शत्रुता कम करने पर सहमति व्यक्त की है. उल्लेखनीय है कि ताइवान की मौजूदा सरकार देश की स्वतंत्रता की पक्षधर है. ताइवान के चीनी मामलों के विभाग ने दोनों नेताओं की मुलाक़ात पर अफ़सोस ज़ाहिर किया है. एक सरकारी बयान में कहा गया है कि लिएन चीन सरकार से ताइवान की संप्रभुता को मान्यता दिलाने या ताइवान को निशाना बनाकर तैनात की गई चीनी मिसाइलों की संख्या कम कराने में नाकाम रहे हैं. एक सरकारी प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि चीन ताइवान से रिश्ते सुधारने के प्रति गंभीर नहीं है. यह 55 वर्षों में ताइवानी राष्ट्रवादी पार्टी कुओमिन्तांग के किसी शीर्ष नेता की चीनी नेतृत्व से पहली बातचीत है. कम्युनिस्टों के हाथों 1949 के गृहयुद्ध में मिली हार के बाद कुओमिन्तांग नेता ताइवान पलायन कर गए थे. विवाद ताइवान में लिएन की चीन यात्रा विवादास्पद साबित हो रही है. मंगलवार को लिएन समर्थकों और ताइवानी स्वतंत्रता के पक्षधर राष्ट्रपति चेन शुई बियान के समर्थकों के बीच झड़पें हुई थीं. अलगाववाद के ख़िलाफ़ चीनी क़ानून के पारित होने के बाद दोनों पक्षों के संबंध बहुत ज़्यादा ख़राब हो गए हैं. चीन हमेशा से ताइवान को अपना विद्रोही प्रांत बताता रहा है. और, नए क़ानून के अनुसार स्वतंत्रता की घोषणा की स्थिति में ताइवान पर हमला जायज़ होगा. लिएन के साथ उनकी पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारियों और सौ से ज़्यादा पत्रकारों का एक दल भी है. |
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