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ताइवान का विपक्ष चीन में | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
ताइवान की विपक्षी राष्ट्रवादी कुओमिनतांग पार्टी 1949 के बाद पहली बार चीन के आधिकारिक दौरे पर जा रही है. यह एक ऐतिहासिक मौका है जब कुओमिनतांग के नेता बीजिंग जा रहे हैं. 1949 में चीन में माओवादी क्रांति के बाद कुओमिनतांग सत्ता से बेदखल हुई थी और उन्हें ताइवान में शरण लेनी पड़ी थी. अब इन नेताओं का एक प्रतिनिधिमंडल पार्टी के उपाध्यक्ष चियांग पिंग कुन की अध्यक्षता में चीन जा रहा है. पिंग कुन ने उम्मीद जताई है कि इस यात्रा से दोनों पक्षों के बीच तनाव में कमी आएगी. पिछले दिनों चीन ने अलगाववाद विरोधी क़ानून बनाया था जिसके प्रावधानों के तहत चीन को ये अधिकार मिले कि अगर ताइवान ने आज़ादी की घोषणा की या चीन से अलग होने की कोशिश की तो उसके ख़िलाफ़ बल प्रयोग किया जाएगा. चीन के इस क़ानून के बाद दोनों पक्षों के बीच ख़ासा तनाव पैदा हो गया है और इस क़ानून के विरोध में शनिवार को लोगों ने सत्तारुढ़ प्रोगेसिव डेमोक्रेटिक पार्टी के नेतृत्व में प्रदर्शन भी किए हैं. लोगों का कहना है इस क़ानून के तहत चीन को ताइवान पर आक्रमण करने की खुली छूट मिल गई है. संवाददाताओं का कहना है कि राष्ट्रवादी कुओमिनतांग पार्टी के संबंध चीन के नेताओं के साथ काफी अच्छे हैं न कि सत्तारुढ़ डेमोक्रेटिक प्रोगेसिव पार्टी से. कुओमिनतांग जब कुओमिनतांग चीन की सत्ता से बेदखल हुई तो उन्होंने न केवल ताइवान में शरण ली बल्कि यहीं से चीन की वैकल्पिक सरकार का गठन भी किया और पूरे चीन का प्रतिनिधित्व करने का दावा करते रहे. 1971 में संयुक्त राष्ट्र ने चीन की माओवादी सरकार को मान्यता दी और कुओमिनतांग अलग थलग पड़ गई. इसके बाद कई देशों ने ताइवान को दी गई मान्यता धीरे धीरे वापस लेनी शुरु कर दी और इस समय क़रीब तीस देश ही ताइवान को कूटनीतिक मान्यता देते हैं. 2000 में ताइवान की राजनीति में एक और महत्वपूर्ण घटना हुई. अब तक देश में कुओमिनतांग पार्टी का उम्मीदवार बनता रहा था लेकिन 2000 में पहली बार प्रोगेसिव डेमोक्रेटिक पार्टी के उम्मीदव चेन शुंग बियान ने राष्ट्रपति पद संभाला. बियान ताइवान की स्वतंत्रता की वकालत करते हैं और लोगों में काफी लोकप्रिय भी है. |
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