| एटॉर्नी जनरल की सलाह सार्वजनिक | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
ब्रिटेन में संसदीय चुनाव के एक सप्ताह पहले इराक़ युद्ध को लेकर एक बार फिर प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर दबाव में हैं. इस बार मामला है दो साल पहले इराक़ युद्ध में ब्रिटेन के शामिल होने के बारे में एटॉर्नी जनरल की क़ानूनी सलाह का. इराक़ युद्ध पर एटॉर्नी जनरल की राय आंशिक रूप में मीडिया में छपने के बाद प्रधानमंत्री कार्यालय ने अटॉर्नी जनरल की क़ानूनी राय को पूरी तरह सार्वजनिक कर दिया है. सात मार्च 2003 के दस्तावेज़ में लॉर्ड गोल्डस्मिथ ने टोनी ब्लेयर से कहा था कि संयुक्त राष्ट्र का दूसरा प्रस्ताव सबसे सुरक्षित क़ानूनी रास्ता है. लेकिन 10 दिन बाद संसद को दी गई उनकी सलाह में इसकी वैधता पर कोई चिंता नहीं व्यक्त की गई थी. अब विपक्षी पार्टियाँ यह जानना चाह रहीं हैं कि कि एटॉर्नी जनरल ने संसद और कैबिनेट को सौंपी गई अपनी राय में युद्ध की वैधता पर चिंता क्यों नहीं व्यक्त की? इनकार हालाँकि एटॉर्नी जनरल उसके बाद से यह कह चुके हैं कि उनकी राय में इराक़ युद्ध वैध था. प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर ने भी विपक्ष के उस दावे को ठुकरा दिया है जिसमें कहा गया है कि उन्होंने देश की जनता को गुमराह किया है. अब सरकार ने इराक़ युद्ध पर एटॉर्नी की राय को सार्वजनिक कर दिया है. बीबीसी के एक राजनीतिक संवाददाता का कहना है कि मीडिया में लीक हुए दस्तावेज़ ने एक संवैधानिक सवाल खड़ा कर दिया है कि इराक़ युद्ध पर महत्वपूर्ण मतदान से पहले सरकार ने कैबिनेट और संसद के सामने सूचनाएँ किस रूप में पेश कीं. लेकिन बीबीसी संवाददाता का कहना है कि इस दस्तावेज़ से यह साबित नहीं होता कि प्रधानमंत्री ब्लेयर ने झूठ बोला जैसा कि विपक्षी कंज़र्वेटिव पार्टी दावा कर रही है. आरोप पार्टी के नेता माइकल हॉवर्ड का कहना है कि सांसदों को युद्ध के लिए मतदान करने को 'बहकाया' गया. लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता चार्ल्स कैनेडी ने प्रधानमंत्री ब्लेयर से अपील की है कि वे इस मामले पर अपने को साफ़-सुथरा साबित करें.
दरअसल एटॉर्नी जनरल लॉर्ड गोल्डस्मिथ की सात मार्च वाली राय कैबिनेट को कभी दिखाई ही नहीं गई बल्कि 17 मार्च वाली उनकी राय को पेश किया गया. हाउस ऑफ़ लॉर्ड्स में एक सवाल के जवाब में इसे भी सार्वजनिक किया गया. सात मार्च की अपनी राय में गोल्डस्मिथ ने इराक़ युद्ध के विरोध में उठने वाले क़ानूनी सवालों का ज़िक्र किया था. उन्होंने चेतावनी दी थी कि युद्ध के विरोधियों के पास क़ानूनी कार्रवाई के लिए कई रास्ते हैं. उन्होंने कहा था कि ऐसी क़ानूनी कार्रवाई से बचने के लिए संयुक्त राष्ट्र में दूसरा प्रस्ताव लाया जा सकता है. लेकिन 17 मार्च को संसद में दिए अपने जवाब में गोल्डस्मिथ ने ऐसी किसी भी तरह की चेतावनी नहीं दी थी. |
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