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इराक़ में हज़ारों बच्चे कुपोषण के शिकार | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
संयुक्त राष्ट्र के एक प्रमुख विशेषज्ञ ने इराक़ में बच्चों में कुपोषण की बढ़ती समस्या पर गहरी चिंता व्यक्त की है. जीन ज़िग्लर ने जिनेवा में चल रहे संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयोग की बैठक में अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की है. रिपोर्ट में कहा गया है कि इराक़ के लगभग 25 प्रतिशत बच्चे गंभीर कुपोषण के शिकार हैं. इसी रिपोर्ट में सूडान के दारफ़ुर और उत्तर कोरिया में भी बच्चों को पर्याप्त खाद्य सामग्री नहीं मिलने पर चिंता प्रकट की गई है. जीन ज़िग्लर का कहना है कि सद्दाम हुसैन के शासनकाल में पाँच वर्ष से कम के सिर्फ़ चार प्रतिशत बच्चे ऐसे थे जो कुपोषण के शिकार थे जबकि अब यह संख्या लगभग आठ प्रतिशत हो गई है. ज़िग्लर का कहना है कि इस समस्या की असली वजह इराक़ पर अमरीका का हमला है. उन्होंने कहा, "दुनिया के सभी देशों को अपनी सरहदों से बाहर भी अपनी ज़िम्मेदारियों का एहसास होना चाहिए, उन्हें ऐसा कोई काम नहीं करना चाहिए जिससे लोगों को खाना मिलना मुश्किल हो जाए." अमरीका ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयोग की बैठक में सबसे बड़ा प्रतिनिधिमंडल भेजा था लेकिन उसके सदस्यों ने इन आरोपों का जवाब देने से इनकार कर दिया. संयुक्त राष्ट्र के विशेषज्ञ का कहना है कि उत्तर कोरिया की स्थिति भी चिंताजनक है क्योंकि वहाँ संयुक्त राष्ट्र से मिलने वाली सहायता का वितरण का ठीक तरह से नहीं हो पा रहा है. सूडान के दारफ़ुर इलाक़े के बारे में उन्होंने कहा है कि लड़ाई के कारण खेती ठप हो गई है और लोगों को अनाज नहीं मिल पा रहा है. ज़िग्लर का कहना है कि वे इस बात से स्तब्ध हैं कि दुनिया में भूख की समस्या घटने की जगह बढ़ रही है. इसी रिपोर्ट में बताया गया है कि हर रोज़ लगभग सत्रह हज़ार बच्चों की मौत कुपोषण से जुड़ी बीमारियों के कारण होती है. उन्होंने इसे शर्मनाक बताया है कि ऐसा तब हो रहा है जबकि दुनिया में समृद्धि बढ़ रही है. |
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