| इराक़ नीति में ख़ामियाँ थीं:समिति | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
ब्रिटेन के सांसदों की एक प्रभावशाली समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि अमरीका के नेतृत्व में इराक़ में युद्ध के बाद की स्थिति के बारे में बनाई गई योजना में कई ग़लतियां की गईं और यह योजना पर्याप्त नहीं थी. रिपोर्ट में कहा गया है कि इराक़ के पुनर्निर्माण और इराक़ी सुरक्षा बलों के पुनर्गठन पर अधिक ध्यान दिया जाना चाहिए था, जो नहीं दिया गया. हालाँकि रिपोर्ट में कहा गया है कि इराक़ में युद्ध के बाद के कई लक्ष्यों को पूरा किया गया है. रिपोर्ट में आगे स्वीकार किया गया है कि इराक़ में संघर्ष ख़त्म होने के बाद चरमपंथी गतिविधियों स्थिति को कम करके आँका गया, सुरक्षा सुधारों और इराक़ी सुरक्षा बलों के पुनर्गठन का कार्य ठीक से नहीं किया गया. रिपोर्ट में ब्रितानी सैनिकों के काम की प्रशंसा की गई है लेकिन यह भी माना गया कि इराक़ के दक्षिण में परिस्थितियाँ बेहतर हैं जहाँ ब्रिटेन के सैनिक तैनात हैं. इराक़ में मौजूद सैनिकों में सबसे अधिक अमरीकी सैनिक हैं और दूसरे नंबर पर ब्रिटेन के सैनिक आते हैं. ब्रितानी सैनिक रिपोर्ट की दूसरी महत्वपूर्ण बात है इराक़ में 2006 तक ब्रिटिश सैनिकों को तैनात रखने पर सहमति. जहाँ दूसरे देश इराक़ से अपने सैनिक हटा रहे हैं या फिर हटाने की बात कर रहे हैं, ब्रिटेन अपने सैनिकों की वर्तमान संख्या अगले साल तक रखना चाहता है.
रिपोर्ट के बारे में लेबर पार्टी के एक सांसद मोहम्मद सरवर का कहना था कि रिपोर्ट दर्शाती है कि अब किसी भी देश के ख़िलाफ़ युद्ध के फैसले का संसद शायद ही समर्थन करे. अब प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर को ऐसा कोई भी फैसला करने से पहले बहुत सोच विचार करना होगा. इस रिपोर्ट पर विपक्षी कंज़रवेटिव पार्टी के विदेश मामलों के प्रवक्ता माइकल एंक्राम कहते हैं, "मुझे लगता है कि इस रिपोर्ट एक तरह से यह मानती है कि ग़लतियाँ हुई हैं. ज्वाइंट इंटलीजेंस कमेटी में स्थिति एक हद तक राजनीतिक है. इसकी बैठकों के कोई नोट्स नहीं लिए गए. मेरा ये कहना है कि हमें ऐसी स्थिति पैदा होने ही नहीं देनी चाहिए थी." इराक़ युद्ध का विरोध करने वाली लिबरल डेमोक्रेट पार्टी ने भी रिपोर्ट का स्वागत किया है और कहा है कि इससे पता चलता है कि इराक़ युद्ध में ग़लतियां हुई हैं. जुलाई 2004 में लॉर्ड बटलर की रिपोर्ट आई थी जिसमें ख़ुफिया जानकारी के इस्तेमाल के तरीक़ों पर चिंता व्यक्त की गई थी. इस रिपोर्ट को इससे जोड़कर देखा जा सकता है जिसमें गुप्तचर एजेंसियों की रिपोर्टों पर नज़र रखने और इससे जुड़े फैसलों पर गंभीरता से विचार करने की बात कही गई है. |
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