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'जापान अपने इतिहास पर फिर नज़र डाले' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
चीन के प्रधानमंत्री वेन जियाबाओ ने पहली बार सार्वजिक तौर पर कहा है कि जापान को अपने इतिहास पर फिर नज़र डालनी चाहिए. चीन में हाल में हुए जापान विरोधी प्रदर्शनों के बाद, चीन की ओर से ये सबसे उच्चस्तरीय प्रतिक्रिया है. अपनी भारत यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री जियाबाओ ने दिल्ली में कहा कि हाल की घटनाओं से जापान को 60 साल पहले एशियाई देशों के अपने कब्ज़े के बारे में आत्म मंथन करना चाहिए. जापान में इतिहास की नई पाठ्य-पुस्तकों में चीन पर जापान के क़ब्ज़े के ब्यौरे को लेकर हुए प्रदर्शनों के बाद चीन और जापान के रिश्तों पर गंभीर असर हुआ है. जापान में प्रदर्शनकारियों ने जापान की संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की दावेदारी पर भी आपत्ति जताई.
जब जापान की सरकार ने कहा कि उसने इतिहास के इस स्कूली पाठ्यक्रम को मंज़ूरी दी है तो चीन में हिंसा भड़क उठी. चीन का कहना है कि ये पाठ्यक्रम द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान जापान की भूमिका की लीपापोती करने की कोशिश है. जापान ने इन घटनाओं पर अफ़सोस ज़ाहिर करते हुए कहा है कि चीन में जापान के व्यवसायिक हितों और संपत्ति की रक्षा की जानी चाहिए. |
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