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ऑक्सफैम ने लगाया धनी देशों पर आरोप | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
ब्रिटेन की जानी मानी राहत संस्था ऑक्सफैम ने धनी देशों पर अपने कृषि उत्पादों पर सब्सिडी जारी रखने का आरोप लगाया है जिससे विकासशील देशों को भारी नुकसान हो रहा है. विश्व व्यापार संगठन को दी गई एक रिपोर्ट में ऑक्सफैम ने कहा हे कि अमरीका और यूरोपीय संघ जैसी बड़ी आर्थिक शक्तियां विश्व स्तरीय व्यापार नियमों के साथ जमकर खिलवाड़ कर रही है. बड़े आर्थिक देश विश्व व्यापार संगठन के कई कानूनों की या तो अनदेखी कर कर रहे हैं या फिर उनका इस्तेमाल अपने फायदे के लिए कर रहे हैं जिसका नुकसान विश्व के ग़रीब देशों को हो रहा है. ऑक्सफैम ने अपनी रिपोर्ट में हैती का उदाहरण दिया है. 1995 में विश्व मुद्रा कोष के दबाव में हैती ने चावल के आयात पर लगाया जाने वाला कर बिल्कुल ख़त्म कर दिया था जिससे हैती में विदेशों से भारी पैमाने पर चावल आया. इसका बुरा परिणाम भुगतना पड़ा हैती के ग़रीब किसानों को. संस्था का कहना है कि अगर बड़े देशों ने अपने कृषि उत्पादों का इसी तरह समर्थन करना जारी रखा तो विकासशील देशों के लाखों किसान बर्बाद हो जाएंगे क्योंकि बड़ी आर्थिक शक्तियां अपने कृषि उत्पादों को ग़रीब देशों में कम कीमतों पर बेचने के लिए हर किस्म का दबाव भी डाल रही हैं. |
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