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सिस्टर निर्मला अंतिम संस्कार में जाएंगी | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
मिशनरीज़ ऑफ़ चैरिटी की प्रमुख सिस्टर निर्मला पोप जॉन पोल के अंतिम संस्कार में हिस्सा लेंगी. दूसरी ओर भारत के राष्ट्रपति अब्दुल कलाम और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने पोप के निधन पर शोक व्यक्त किया है. सिस्टर निर्मला ने पत्रकारों से बातचीत में कहा,'' मैं अंतिम संस्कार में हिस्सा लेने वैटिकन जाऊंगी.'' मदर टेरेसा ने 1950 में कोलकाता में मिशनरीज़ ऑफ़ चैरिटी की स्थापना की थी. उनके 1997 में निधन के बाद से सिस्टर निर्मला इसकी देखरेख करती हैं और यह संगठन आज भी भारत में समाज सेवा के क्षेत्र में सक्रिय है. सिस्टर निर्मला का कहना था कि पोप के निधन से मदर टेरेसा के संत घोषित करने की प्रक्रिया पर कोई असर नहीं पड़ेगा. इधर राष्ट्रपति अब्दुल कलाम ने अपने शोक संदेश में कहा कि दुनिया ने एक ऐसी शख्सियत खो दी है जिसने मानवीय गरिमा और स्वतंत्रता के लिए काम किया. प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा कि वे 'जनता के पोप' थे. उन्होंने मदर टेरेसा को संत बनाने की घोषणा कर भारतीयों का दिल जीत लिया था. भारतीय कार्डिनल इधर भारतीय कार्डिनल भी पोप के अंतिम संस्कार और नए पोप के चयन में हिस्सा लेने के लिए रवाना हो रहे हैं. दुनिया भर में 184 कार्डिनल हैं जिनमें से पांच भारत के हैं. नए पोप के चुनाव में इन पांचों कार्डिनलों में से तीन कार्डिनलों की की भूमिका होगी क्योंकि दो अन्य कार्डिनलों की उम्र 80 से अधिक है और नियमों के अनुसार 80 से अधिक उम्र वाले कार्डिनल वोट नहीं डाल सकते. भारत के पांच कार्डिनल हैं मुंबई के कार्डिनल इवान डियास, एरनाकुलम के कार्डिनल वर्के विथयाथिल, रांची के कार्डिनल टेलिस्फोर टोप्पो, कार्डिनल दोरइस्वामी सिमॉन लोरदुसामी और कार्डिनल इग्नाशियस पिमेंटा. कार्डिनल दोरइस्वामी और कार्डिनल पिमेंटा वोट नहीं दे सकेंगे. भारत में लगभग एक करोड़ छह लाख कैथोलिक हैं. |
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