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दुनिया भर में पोप को श्रद्धांजलि | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
दुनिया भर के एक अरब से भी अधिक रोमन कैथोलिक ईसाईयों में से बहुत से लोग अपने धार्मिक गुरु पोप जॉन पॉल द्वितीय की याद में प्रार्थनाएँ कर रहे हैं. उनका पार्थिव शरीर अंतिम दर्शनों के लिए वैटिकन में रखा गया है. शनिवार को पोप का निधन हो गया था जिसके बाद अब चर्च ने नौ दिन के शोक की घोषणा की है. वे 84 वर्ष के थे और काफ़ी समय से बीमार थे. लातिन अमरीका, यूरोप, अफ्रीका और एशियाई देशों के लाखों ईसाई उन्हें श्रद्धांजलि दे रहे हैं. इसके साथ ही मुस्लिम बहुल देशों और भारत जैसे (हिंदू बहुल) देशों में भी पोप के लिए शोक सभाएँ आयोजित की गई हैं. वैटिकन के पादरियों और इटली के नेताओं ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की. उन्हें श्रद्धांजलि देनेवालों में इटली के प्रधानमंत्री सिल्वियो बर्लुस्कोनी भी शामिल थे. दूसरी ओर पोप की स्मृति में सेंट पीटर्स स्कवॉयर पर आयोजित प्रार्थना सभा के लिए हज़ारों लोग जमा हुए हैं. उनके निधन की ख़बर के बाद दुनियाभर में लाखों लोग शोक में डूब गए हैं. उनके निधन पर लोग रो रहे हैं और प्रार्थनाएँ कर रहे हैं. रोम के सेंट पीटर्स स्क्वॉयर में लगभग एक लाख लोगों ने मोमबत्तियों जलाकर प्रार्थना की. इसके पहले शनिवार रात को पोप के निधन के बाद शहर के गिरजाघरों की घंटियाँ बजाईं गईं. तबीयत ख़राब गुरुवार से पोप की तबीयत गंभीर रुप से ख़राब थी. उनका अंत दिल और गुर्दे की समस्याओं के कारण आया. उनका रक्तचाप लगातार कम होता गया और उन्हें सांस लेने में दिक्कतें आ रही थीं. शुक्रवार को पोप ने वैटिकन के सभी अधिकारियों को अलविदा भी कहा था और बाईबिल के कुछ अंश पढ़कर सुनाने को कहा था. उन्होंने ईसा मसीह को सलीब पर चढ़ाए जाने का ब्यौरा बाइबिल से पढ़कर सुनाए जाने के लिए कहा था.
जब उनके निधन की घोषणा की गई तो रोम के सेंट पीटर्स सक्वेयर में एकत्र लोगों की भीड़ पूरी तरह शांत हो गई. जब चर्च की घंटियाँ बजाकर इस समाचार की घोषणा की गई तो हज़ारों अन्य लोग भी सेंट पीटर्स सक्वेयर में पहुँच गए. अनेक लोगों को प्रार्थना करते और रोते देखा गया. अंतिम संस्कार इटली से मिल रही ख़बरों के अनुसार पोप जॉन पॉल के अंतिम संस्कार की तारीख अभी तय नहीं हुई है लेकिन बुधबार के बाद ही अंतिम संस्कार किए जाने की संभावना है. इतालवी टीवी के अनुसार पहली बार दुनिया के इतने सारे नेता एक ही जगह एकत्र होंगे. अगले पोप का चयन दुनिया भर के कार्डिनल मिलकर एक बैठक में करेंगे. इनकी बैठक पोप के निधन के बाद 21 दिन के भीतर होनी ज़रूरी है. पहले ग़ैर-इतालवी पोप 1978 में पोप बने जॉन पॉल द्वितीय पिछले 455 वर्षों में पहले ग़ैर-इतालवी नागरिक थे.
पोप बनने वाले वो पहले पोलिश नागरिक भी थे. शुक्रवार से ही श्रद्धालुओं पोप के लिए प्रार्थना कर रहे थे. दुनिया भर में पोप जॉन पॉल द्वितीय को धर्मगुरू ही नहीं, न्याय को धर्म का हिस्सा मानने वाले व्यक्ति के रूप में देखा जाता था. शायद यही वजह रही कि उनका सम्मान करने वाले दुनिया के हर देश में मौजूद हैं. उदारता कैथोलिक ईसाई संप्रदाय के धर्मगुरू बनने के बाद पोप कभी भी वैटिकन की चारदीवारी के बीच नहीं घिरे रहे और ख़ूब यात्राएँ कीं. उन्होंने कभी भी राजनीतिक सीमाओं को स्वीकार नहीं किया. वे कई ऐसे देशों में गए जहाँ पहले कोई शीर्ष ईसाई धर्मगुरू नहीं गया. 1981 पोप के जीवन का एक अहम वर्ष था जब तुर्की के एक कट्टरपंथी महमत अली अगका ने वेटिकन में सेंट पीटर्स गिरजाघर के पास पोप को गोली मार दी जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गए. लेकिन पोप ने उदारता की मिसाल पेश करते हुए इस व्यक्ति को माफ़ कर दिया. उन्होंने न सिर्फ़ माफ़ किया बल्कि अनेक अवसरों पर सदियों पहले ईसाई धर्म मानने वाले लोगों की ज़्यादतियों के लिए दुनिया से क्षमायाचना की. रोग ने उन्हें कमज़ोर कर दिया लेकिन उनके विचार, उनकी गतिविधियों और जनकल्याण के प्रति उनकी अदम्य प्रतिबद्धता कम नहीं हुई. |
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